
भारत में बुनियादी ढांचे का क्रांति तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है। दिल्ली-मुंबई, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स ने सड़क परिवहन की तस्वीर ही बदल दी है। आमतौर पर 4, 6 या 8 लेन वाले ये एक्सप्रेसवे देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में मजबूत नींव दे रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे चौड़ा एक्सप्रेसवे कौन सा है, जिसमें पूरे 14 लेन हैं? जवाब है दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे! यह इकलौता ऐसा हाईवे है, जहां गाड़ियां 14 लेन में फर्राटा भरती हैं।
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अनोखी बनावट और विस्तार
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे कुल 96 किलोमीटर लंबा है, जो दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के मेरठ तक फैला है। इसकी सबसे खासियत इसका चौड़ा हिस्सा है – दिल्ली से गाजियाबाद के डासना तक के लगभग 27 किलोमीटर का ट्रैक 14 लेन वाला है। इसमें 6 मुख्य एक्सप्रेस लेन और 8 सर्विस लेन शामिल हैं, जो भारी ट्रैफिक को सहजता से हैंडल करते हैं। बाकी हिस्से 6 या 8 लेन के हैं।
इस पर 23 पुल, 10 फ्लाईओवर, 3 रेलवे ओवरब्रिज और 35 अंडरपास बने हैं, जो यात्रा को बाधारहित बनाते हैं। निर्माण में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए, जिसमें NHAI ने 40% फंडिंग की।
चरणबद्ध निर्माण की कहानी
यह एक्सप्रेसवे चार चरणों में बनाया गया। चरण-1 (8.7 किमी, निजामुद्दीन ब्रिज से UP बॉर्डर तक) 14 लेन वाला था, जिसे मई 2018 में पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटित किया। चरण-2 (19 किमी, UP बॉर्डर से डासना) भी 14 लेन का है। चरण-3 (22 किमी, डासना से हापुड़) 8 लेन वाला 2019 में चालू हुआ। अंतिम चरण-4 (46 किमी, डासना से पारतापुर मेरठ तक) 2021 में आम जनता के लिए खुल गया। 2023 तक पूरा प्रोजेक्ट चालू हो चुका, जो NCR के ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान है।
पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक सुविधाएं
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ चौड़ा ही नहीं, बल्कि हाई-टेक भी है। इसमें डेडिकेटेड साइकिल ट्रैक, सोलर लाइटिंग, वर्टिकल गार्डन, ड्रिप इरिगेशन और CCTV नेटवर्क है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन और इमरजेंसी हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं इसे स्मार्ट बनाती हैं। टोल प्लाजा और एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स डिजिटल हैं, जो FASTag से सुगम हैं। यह डिजाइन दिल्ली-NCR के प्रदूषण को कम करने में भी सहायक है, क्योंकि पुराने NH-24 से ट्रैफिक शिफ्ट हो गया।
यात्रियों को अपार लाभ
पहले दिल्ली से मेरठ पहुंचने में 4-5 घंटे लगते थे, अब सिर्फ 45 मिनट से 1 घंटे! यह 120 किमी/घंटा स्पीड के लिए डिजाइन किया गया है। NCR, गाजियाबाद, हापुड़ और मेरठ के व्यापारिक केंद्रों को जोड़ते हुए आर्थिक विकास को बूस्ट दे रहा है। किसानों, उद्योगपतियों और यात्रियों सबको फायदा। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, रोजाना लाखों वाहन गुजरते हैं, जिससे ईंधन बचत और CO2 उत्सर्जन में कमी आई है।
भविष्य की संभावनाएं
2026 तक यह एक्सप्रेसवे भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक बनेगा। गंगा एक्सप्रेसवे जैसे नए प्रोजेक्ट्स के साथ मिलकर यह गोल्डन क्वाड्रिलेटरल को मजबूत करेगा। हालांकि, रखरखाव और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर नजर रखनी होगी। कुलदीप राघव जैसे विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे प्रोजेक्ट्स भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ेंगे। क्या आप इस पर सफर कर चुके हैं? अपनी राय साझा करें!















