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Railway Heights: बादलों के बीच है भारत का ये रेलवे स्टेशन! जानें कहाँ है देश का सबसे ऊँचा ‘स्टेशन मास्टर’ ऑफिस।

क्या आपने कभी ऐसे स्टेशन मास्टर के ऑफिस के बारे में सुना है जो बादलों के बीच काम करता है? भारत का ये अनोखा रेलवे स्टेशन ऊँचाई, रोमांच और रिकॉर्ड तीनों में नंबर वन है। जानिए कहाँ है ये जगह और क्यों पूरी दुनिया हैरान है।

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Railway Heights: बादलों के बीच है भारत का ये रेलवे स्टेशन! जानें कहाँ है देश का सबसे ऊँचा 'स्टेशन मास्टर' ऑफिस।
Railway Heights: बादलों के बीच है भारत का ये रेलवे स्टेशन! जानें कहाँ है देश का सबसे ऊँचा ‘स्टेशन मास्टर’ ऑफिस।

जब ट्रेन पहाड़ों की गोद में रेंगती हुई आगे बढ़ती है, खिड़की के बाहर बादल आँखों के बराबर आ जाते हैं और हवा में ठंडक के साथ इतिहास घुल जाता है,यही अनुभव देता है घुम रेलवे स्टेशन, जिसे भारत का सबसे ऊँचा रेलवे स्टेशन होने का गौरव हासिल है। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग ज़िले में स्थित यह छोटा-सा स्टेशन समुद्र तल से लगभग 2,258 मीटर (7,407 फीट) की ऊँचाई पर मौजूद है। ऊँचाई इतनी कि कई बार यहाँ स्टेशन की इमारत बादलों के भीतर छिप जाती है। यही वजह है कि इसे अक्सर “बादलों के बीच बसा रेलवे स्टेशन” कहा जाता है।

टॉय ट्रेन, लेकिन विरासत बड़ी

घुम रेलवे स्टेशन विश्व प्रसिद्ध दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का हिस्सा है, जिसे लोग प्यार से टॉय ट्रेन कहते हैं। 19वीं सदी के अंत में बनी यह नैरो-गेज रेलवे लाइन आज UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। धीमी रफ्तार से चलती ट्रेन, तीखे मोड़, सुरंगें और पहाड़ी ढलान-सब मिलकर इसे सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि एक अनुभव बना देते हैं।

सबसे ऊँचा ‘स्टेशन मास्टर’ ऑफिस

घुम स्टेशन को लेकर एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि यहाँ स्थित स्टेशन मास्टर का कार्यालय देश के सबसे ऊँचाई पर बने स्टेशन मास्टर ऑफिसों में गिना जाता है। यानी भारतीय रेल का प्रशासनिक कामकाज भी यहाँ उसी ऊँचाई पर चलता है, जहाँ आम तौर पर सिर्फ पहाड़ी बस्तियाँ और बादल दिखाई देते हैं।

हालाँकि भारतीय रेल के आधिकारिक दस्तावेज़ों में “सबसे ऊँचा स्टेशन मास्टर ऑफिस” का अलग से कोई रिकॉर्ड टैग नहीं मिलता, लेकिन चूँकि घुम स्वयं भारत का सबसे ऊँचा रेलवे स्टेशन है, इसलिए यहाँ कार्यरत स्टेशन मास्टर का दफ्तर स्वाभाविक रूप से देश के सबसे ऊँचे दफ्तरों में शामिल हो जाता है।

मौसम, नज़ारे और रोमांच

घुम में मौसम पल-पल बदलता है। कभी धूप, तो कभी घना कोहरा। सर्दियों में तापमान शून्य के करीब पहुँच जाता है, जबकि मानसून में बादलों की आवाजाही इतनी तेज़ होती है कि स्टेशन कुछ देर के लिए पूरी तरह गायब-सा लगने लगता है। साफ मौसम में यहाँ से कंचनजंगा पर्वत श्रृंखला की झलक मिलना किसी बोनस से कम नहीं।

सिर्फ स्टेशन नहीं, एक पहचान

घुम रेलवे स्टेशन महज़ एक ट्रांज़िट पॉइंट नहीं है। यह भारत की इंजीनियरिंग विरासत, पहाड़ी जीवन और रेलवे इतिहास का जीवित प्रतीक है। यहाँ हर दिन स्टेशन मास्टर से लेकर प्वाइंट्समैन तक, सभी लोग कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी रेलवे की रफ्तार बनाए रखते हैं। आज जब हाई-स्पीड ट्रेनों और वंदे भारत की चर्चा होती है, तब घुम स्टेशन याद दिलाता है कि भारतीय रेल की असली ऊँचाई सिर्फ गति में नहीं, बल्कि उन जगहों तक पहुँचने में है -जहाँ बादल भी सहयात्री बन जाते हैं।

Railway Heights
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info@divcomkonkan.in

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