भारत की पवित्र गंगा नदी देश की सबसे लंबी नदी के रूप में जानी जाती है, जो उत्तराखंड के गंगोत्री ग्लेशियर से निकलकर 2525 किलोमीटर की यात्रा तय करती है। लेकिन दूसरी सबसे लंबी नदी का नाम सुनते ही ज्यादातर लोग हैरान रह जाते हैं। यह गोदावरी है, जो महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर से शुरू होकर 1465 किलोमीटर लंबी है। आमतौर पर लोग यमुना या ब्रह्मपुत्र को दूसरा स्थान देते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।

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भ्रम की जड़ कहां है?
लोगों का भ्रम इसलिए होता है क्योंकि यमुना गंगा की प्रमुख सहायक नदी है और दिल्ली-प्रयागराज तक चर्चित रहती है। इसकी लंबाई 1376 किलोमीटर है, जो गोदावरी से कम है। ब्रह्मपुत्र को भुला दिया जाता है, क्योंकि भारत में यह मात्र 900 किलोमीटर बहती है, हालांकि कुल लंबाई 2900 किलोमीटर है। नर्मदा 1312 किलोमीटर और कृष्णा 1400 किलोमीटर लंबी होने के बावजूद गोदावरी से पीछे हैं। गोदावरी को दक्षिण गंगा कहा जाता है, जो प्रायद्वीपीय नदियों की सबसे लंबी है। यह महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा को सींचती है।
गोदावरी का उद्गम और यात्रा
गोदावरी का उद्गम नासिक जिले के ब्रह्मगिरि पहाड़ियों में है। यह पश्चिमी घाट से निकलकर पूर्व की ओर बहती है और बंगाल की खाड़ी में मिलती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां प्राणहिता, इंद्रावती, मंजीरा और सबरी हैं। गोदावरी का अपवाह क्षेत्र 3.12 लाख वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल क्षेत्र का लगभग 10 प्रतिशत है। यह नदी दक्षिण भारत की जीवनरेखा है, जो कृषि और जलविद्युत का प्रमुख स्रोत बनी हुई है। पुष्कर मेला और कुशावर्त घाट पर लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं।
आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व
गोदावरी लाखों किसानों को पानी देकर सिंचाई की सुविधा देती है। इस पर सरस्वती सागर और जयंत सागर जैसी बड़ी परियोजनाएं बनी हैं, जो बाढ़ रोकती हैं और बिजली बनाती हैं।
सांस्कृतिक रूप से ये आदि शंकराचार्य और गोदावरी पुष्करम से जुड़ी है। जलवायु परिवर्तन से इसकी धारा कम हो रही है, लेकिन नमामि गोदावरी जैसी योजनाएं इसे नया जीवन दे रही हैं। गंगा सफाई की तरह गोदावरी संरक्षण पर भी सरकार ध्यान दे रही है।
इससे मिलता है एक सबक
यह फैक्ट चेक बताता है कि सामान्य ज्ञान में कितने भ्रम छिपे हैं। स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले आंकड़े गोदावरी को स्पष्ट रूप से दूसरी सबसे लंबी नदी बताते हैं। अगली बार किसी क्विज में पूछा जाए तो सही जवाब गोदावरी ही दें। भारत की नदियां न केवल जल स्रोत हैं, बल्कि हमारी सभ्यता की आधारशिला भी। इनके संरक्षण से ही देश का भविष्य सुरक्षित होगा।















