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Police Identity: यहाँ की पुलिस ‘खाकी’ नहीं ‘सफेद’ वर्दी पहनती है! अंग्रेजों के दौर से जुड़ी है ये अनोखी वजह, जानें पूरा सच।

अंग्रेजों के दौर से जुड़ा एक रहस्य जो आज भी हमारी पुलिस की पहचान बदल देता है। क्या वजह है कि सुरक्षा के प्रतीक ‘खाकी’ नहीं बल्कि ‘सफेद’ वर्दी में नजर आते हैं? जानिए इतिहास और अनोखी वजह जो शायद आपने कभी नहीं सुनी होगी।

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Police Identity: यहाँ की पुलिस 'खाकी' नहीं 'सफेद' वर्दी पहनती है! अंग्रेजों के दौर से जुड़ी है ये अनोखी वजह, जानें पूरा सच।
Police Identity: यहाँ की पुलिस ‘खाकी’ नहीं ‘सफेद’ वर्दी पहनती है! अंग्रेजों के दौर से जुड़ी है ये अनोखी वजह, जानें पूरा सच।

जब बात भारत की पुलिस की वर्दी की होती है, तो ज़्यादातर लोगों के मन में खाकी रंग की छवि उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश के कुछ हिस्सों में पुलिस अभी भी सफेद वर्दी पहनती है? कोलकाता पुलिस इसका जीवंत उदाहरण है, और इसके पीछे छुपा है ब्रिटिश काल का एक लंबा इतिहास।

सफेद वर्दी का ब्रिटिश कनेक्शन

19वीं सदी के मध्य में भारत में पुलिस और कैम्प फोर्स की ड्रेस सादा सफेद रंग की होती थी। ब्रिटिश प्रशासन ने कानून व्यवस्था को संगठित करते समय इसे अपनाया। उस समय सफेद कपड़े “साफ-सुथरे और सम्मानजनक” दिखते थे, और अधिकारी इससे एक पेशेवर छवि बनाना चाहते थे। लेकिन सफेद वर्दी के साथ एक बड़ी समस्या थी,यह जल्दी गंदी हो जाती थी। धूल और मिट्टी के बीच सफेद कपड़े पर दाग आसानी से दिखाई देते थे, और यह ड्यूटी में असुविधाजनक साबित हुआ।

खाकी का आगमन और उसकी वजह

इस समस्या का समाधान ब्रिटिश अधिकारी सर हैरी लम्सडेन ने खोजा। 1846-47 में उत्तरी सीमा पर ‘Corps of Guides’ के लिए उन्होंने खाकी रंग के कपड़े अपनाए।

  • खाकी उर्दू शब्द “खाक” यानी धूल/मिट्टी से लिया गया।
  • खाकी रंग धूल और गंदगी छिपाने में सक्षम था और ग्रामीण इलाकों में पुलिस के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ।
  • धीरे-धीरे भारतीय पुलिस बलों में यह रंग मानक बन गया और आज अधिकांश राज्यों की पुलिस खाकी रंग की वर्दी पहनती है।

कोलकाता पुलिस सफेद वर्दी की विशिष्ट पहचान

लेकिन कोलकाता पुलिस इस ट्रेंड से अलग है। इसकी स्थापना 1845 में हुई थी, और उस समय सफेद वर्दी को ही अपनाया गया। खाकी रंग के प्रस्ताव के बावजूद कोलकाता पुलिस ने सफेद वर्दी को ही अपनाए रखा।

विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

  1. जलवायु: कोलकाता जैसे गर्म और नम शहर में सफेद कपड़ा गर्मी को प्रतिबिंबित करता है, जिससे अधिकारियों को आराम मिलता है।
  2. पहचान: सफेद वर्दी ने कोलकाता पुलिस को अन्य राज्यों की पुलिस से अलग पहचान दी।

आज की स्थिति

आज भी कोलकाता पुलिस और कुछ अन्य विभागों की डेली ड्यूटी वर्दी सफेद है। यह न सिर्फ इतिहास की याद दिलाती है, बल्कि शहर की पुलिस की विशेष पहचान और पारंपरिक विरासत को भी दर्शाती है। एक नजर में देखें तो सफेद से खाकी तक की यात्रा केवल रंग की कहानी नहीं, बल्कि यह भारत की पुलिस के बदलते समय और कार्यशैली का दर्पण है।

पहलूतथ्य
प्रारंभिक रंगसफेद (ब्रिटिश शासन के शुरुआती दौर में)
खाकी क्यों?गंदगी छिपाने और कामकाजी रंग के रूप में उपयोगी
कोलकाता की अनोखी वर्दीगर्म मौसम में आरामदायक और पहचान में अलग
Police Identity
Author
info@divcomkonkan.in

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