
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में स्थित गाजीपुर जिला आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। देश के सैन्य इतिहास में इस जिले का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, इसे यूँ ही ‘इंडियन आर्मी की फैक्ट्री’ नहीं कहा जाता; यहाँ की मिट्टी में ही देशभक्ति का जज्बा घुला हुआ है, चीन और पाकिस्तान की दुर्गम सीमाओं पर तैनात भारतीय सेना की टुकड़ियों में इस जिले के जवानों का भारी दबदबा रहता है।
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गहमर: सैनिकों का वह गांव जिसे दुनिया सलाम करती है
गाजीपुर जिले का गहमर (Gahmar) गांव एशिया के सबसे बड़े गांव के रूप में विख्यात है, लेकिन इसकी असली पहचान यहाँ के जांबाज सैनिक हैं।
- सैनिकों की संख्या: गहमर के लगभग 12,000 से 15,000 जवान वर्तमान में भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों में कार्यरत हैं।
- सेवानिवृत्त वीरों की फौज: गांव में करीब 10,000 से 15,000 पूर्व सैनिक भी रहते हैं, जो नई पीढ़ी को सेना के लिए तैयार करते हैं।
- भर्ती की परंपरा: यहाँ शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहाँ से कोई सेना में न हो कई परिवारों की तो चार-चार पीढ़ियाँ वतन की रक्षा में समर्पित रही हैं। YouTube +5
प्रथम विश्व युद्ध से कारगिल तक की गौरवगाथा
गहमर की वीरता का इतिहास दशकों पुराना है। प्रथम विश्व युद्ध (WWI) के दौरान यहाँ के 228 जवानों ने युद्ध में भाग लिया था, जिनमें से 21 वीरगति को प्राप्त हुए थे, इसके बाद 1965, 1971 के भारत-पाक युद्ध और 1999 के कारगिल युद्ध में भी इस गांव के रणबांकुरों ने अदम्य साहस का परिचय दिया।
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भोर की पहली किरण के साथ शुरू होती है ट्रेनिंग
गांव के युवाओं के लिए सेना में जाना महज एक नौकरी नहीं, बल्कि जीवन का लक्ष्य है, गंगा किनारे मठिया घाट पर बने 1600 मीटर के ट्रैक पर हर सुबह और शाम सैकड़ों युवा पसीना बहाते नजर आते हैं, यहाँ पूर्व सैनिक स्वयं इन युवाओं को अनुशासन और शारीरिक फिटनेस की ट्रेनिंग देते हैं ताकि वे सीमा पर दुश्मनों के दांत खट्टे कर सकें।















