
उत्तर प्रदेश रेल नेटवर्क का महासागर है, जहां छोटे-बड़े लगभग 500 रेलवे स्टेशन और हॉल्ट यात्रियों का स्वागत करते हैं। प्रयागराज जैसे जिले में तो 47 स्टेशन हैं, जो राज्य के रेलीय विकास का प्रतीक हैं। लेकिन इस विशाल नेटवर्क में एक ऐसा जिला छिपा है, जहां एक भी रेलवे स्टेशन नहीं है। जी हां, श्रावस्ती जिला- देवीपाटन मंडल का यह ऐतिहासिक कोना आज भी रेल की पटरियों से वंचित है। ज्यादातर लोग, यहां तक कि जीके विशेषज्ञ भी, इसका नाम तपाक से नहीं बता पाते।
श्रावस्ती की यह अनूठी स्थिति नई नहीं है। राप्ती नदी के तट पर बसा यह जिला भगवान बुद्ध की तपोभूमि के रूप में विख्यात है। प्राचीन जेतवन विहार और अनाथपिंडिक का नाम यहां की धरोहर को अमर बनाते हैं। लेकिन आधुनिक विकास के दौर में रेल कनेक्टिविटी का अभाव स्थानीय लोगों के लिए चुनौती बना हुआ है। दिलचस्प तथ्य यह है कि रेलवे स्टेशन बनने से पहले ही यहां एयरपोर्ट विकसित हो चुका है, जो पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है। जिले के निवासी लंबे समय से ट्रेन सुविधा की मांग कर रहे हैं, क्योंकि निकटतम स्टेशन बहराइच या गोंडा में हैं, जो कई किलोमीटर दूर हैं।
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प्रशासनिक ढांचा और आंकड़े
श्रावस्ती जिले में तीन तहसीलें- भिनगा (मुख्यालय), इकौना और जमुनहा- हैं। पांच विकास खंड और करीब 11 पुलिस थाने इसे संचालित करते हैं। जनसंख्या के लिहाज से मध्यम आकार का यह जिला कृषि और धार्मिक पर्यटन पर निर्भर है। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से अधिकांश रेल नेटवर्क से जुड़े हैं, लेकिन श्रावस्ती अपवाद है। प्रयागराज के 47 स्टेशनों की तुलना में यहां शून्य- यह विडंबना रेल मंत्रालय के सामने सवाल खड़ा करती है।
हाल के वर्षों में बदलाव के संकेत दिखे हैं। खलीलाबाद-बहराइच नई रेल लाइन परियोजना के तहत पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर मंडल ने भूमि अधिग्रहण शुरू कर दिया है। उप मुख्य अभियंता (निर्माण) के प्रस्ताव के अनुसार, यह लाइन श्रावस्ती को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि जमीन चिह्नीकरण और मुआवजा प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इससे न केवल स्थानीय व्यापारियों को फायदा होगा, बल्कि बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा आसान हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 तक यह प्रोजेक्ट पूरा हो सकता है, जो जिले को रेल मानचित्र पर ला देगा।
ऐतिहासिक महत्व और चुनौतियां
श्रावस्ती का इतिहास बौद्ध ग्रंथों से जुड़ा है। lभगवान् बुद्ध ने यहां वर्षा ऋतु का कई बार वास किया। जिले में प्राचीन अवशेष और मठ पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन रेल अभाव से पहुंच मुश्किल है। स्थानीय किसान चावल, गन्ना और दालें उगाते हैं, पर बाजार तक पहुंच सीमित है। युवा दिल्ली-मुंबई की नौकरियों के लिए बसों पर निर्भर हैं। महराजगंज जैसे अन्य जिलों के पुराने दावे गलत साबित हुए, क्योंकि वहां अब स्टेशन हैं। श्रावस्ती ही एकमात्र ऐसा जिला रह गया।
रेल मंत्री के हालिया बयानों में पूर्वांचल कनेक्टिविटी पर जोर है। श्रावस्ती के विधायक ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया, जिसके बाद सर्वे तेज हुआ। यदि प्रोजेक्ट समय पर पूरा हुआ, तो यह उत्तर प्रदेश के रेल विस्तार की मिसाल बनेगा। फिलहाल, जिले के लोग उम्मीद बांधे हैं।















