घर खरीदने का सपना होम लोन से पूरा होता है, लेकिन मासिक किस्त समय पर न चुकाने से आर्थिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं। एक छोटी सी देरी भी लाखों रुपये के अतिरिक्त खर्च का कारण बन जाती है। केवल तीन दिन से अधिक विलंब पर ही इसे चूक माना जाता है, फिर जुर्माना लगता है, ब्याज का बोझ बढ़ता है और क्रेडिट हेल्थ को करारा झटका लगता है। लाखों लोग हर साल इसी लापरवाही की कीमत चुकाते हैं।

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जुर्माने की राशि
EMI लेट होने पर बैंक तुरंत 1 से 2 प्रतिशत तक मासिक शुल्क वसूलते हैं। यह आउटस्टैंडिंग राशि पर लगता है। मान लीजिए आपकी किस्त 50 हजार रुपये की है और वह 30 दिन विलंबित हो जाती है, तो 500 से 1000 रुपये तक का दंड देना पड़ सकता है। लोन समझौते में यह शर्त पहले से तय रहती है। देरी जितनी लंबी, बोझ उतना अधिक। ऊपर से पेनल्टी ब्याज जुड़ जाता है, जो चक्रवृद्धि तरीके से कुल कर्ज को फुला देता है। नौकरी में अनिश्चितता या अचानक खर्च के समय लोग फंस जाते हैं।
क्रेडिट स्कोर का नुकसान
आपका क्रेडिट स्कोर भुगतान इतिहास पर 35 प्रतिशत निर्भर करता है। 30 दिनों के बाद बैंक इसे क्रेडिट ब्यूरो में दर्ज कराते हैं। एक किस्त चूकने से 50 से 100 अंक गिरावट आ सकती है। बार बार देरी पर यह 200 अंक से अधिक हो जाता है। अच्छा स्कोर था 750, अब 650 रह गया तो नया लोन लेना मुश्किल और उसकी ब्याज दरें 2-3 प्रतिशत बढ़ जाती हैं। इसका असर 36 महीनों तक बना रहता है। कुल मिलाकर यह रिकॉर्ड सात साल तक आपके नाम से जुड़ा रहता है। नया घर, कार या बिजनेस लोन सब प्रभावित होते हैं।
बैंकों की प्रक्रिया
सबसे पहले बैंक मैसेज, ईमेल और फोन से याद दिलाते हैं। 30-60 दिनों में शुल्क लगता है। बकाया पर अतिरिक्त ब्याज जोड़ दिया जाता है। 90 दिनों के बाद लोन खराब श्रेणी में चला जाता है। तब संपत्ति अटैचमेंट की कार्रवाई शुरू हो सकती है। हालांकि कुछ राहत के विकल्प हैं। आप बैंक से किस्त पुनर्गठन या अस्थायी छूट मांग सकते हैं। स्वचालित डेबिट सेटअप सबसे सुरक्षित तरीका है।
समय पर भुगतान के उपाय
इमरजेंसी निधि बनाएं, कई बैंक खाते लिंक रखें। मोबाइल ऐप पर अलर्ट चालू करें। देरी हो जाए तो फौरन बैंक से बात करें और नया प्लान बनाएं। अन्य भुगतान समय पर रखकर स्कोर सुधारें। छह महीने की नियमितता से पुराना नुकसान भर जाता है। जागरूक रहें तो होम लोन का बोझ आसान बनेगा।















