भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई अब सीमाओं को पार कर दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहा है। 2026 में लॉन्च हुए ग्लोबल विस्तार से फोनपे और गूगल पे जैसे ऐप्स विदेश यात्रा के दौरान बिना करेंसी बदलाव के काम करेंगे। यह बदलाव पर्यटकों, व्यापारियों और प्रवासियों के लिए क्रांतिकारी साबित हो रहा है, क्योंकि अब छोटे-बड़े खर्चे बस क्यूआर कोड स्कैन से निपट जाएंगे।

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ग्लोबल यूपीआई की शुरुआत और महत्व
यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय रूप यात्रियों को कैश या विदेशी कार्ड की निर्भरता से आजाद करता है। भारतीय मोबाइल नंबर से जुड़े ऐप अब लोकल मर्चेंट्स के क्यूआर पर सीधे भुगतान की सुविधा देते हैं। करेंसी रूपांतरण बैंक के वास्तविक दर पर स्वचालित होता है, जिससे अतिरिक्त शुल्क बचता है। तेजी से बढ़ते डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौर में यह सुविधा भारत की आर्थिक शक्ति को वैश्विक मंच पर मजबूत करती है। खासकर पड़ोसी और पर्यटन केंद्रित देशों में यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
प्रमुख देश जहां यूपीआई सक्रिय
दस चुनिंदा देशों में यह सेवा पूरी तरह चालू है। भूटान सबसे पहले जुड़ा, जहां बाजारों और होटलों में आसानी से इस्तेमाल हो रहा। नेपाल के मंदिरों और बाजारों में पर्यटक अब बिना झंझट भुगतान कर पा रहे। श्रीलंका तथा मालदीव के रिसॉर्ट्स में यह सुविधा होटल बिलिंग को सरल बना रही। सिंगापुर के व्यस्त बाजारों से लेकर यूएई के शानदार मॉल्स तक क्यूआर स्कैन पर्याप्त। मलेशिया, फ्रांस, अमेरिका तथा थाईलैंड में भी पायलट प्रोजेक्ट सफल साबित हो चुके। इन देशों के व्यापारी भी भारतीय पर्यटकों की संख्या बढ़ने से लाभान्वित हो रहे।
ऐप्स के जरिए पेमेंट की सरल प्रक्रिया
उपयोग बेहद आसान है। यात्रा से पहले ऐप में भारतीय बैंक खाता लिंक सुनिश्चित करें। अंतरराष्ट्रीय रोमिंग या ई-सिम डेटा चालू रखें। दुकान पर क्यूआर कोड स्कैन करें, राशि डालें और पिन डालकर पुष्टि करें। प्रति लेनदेन सीमा छोटे खर्चों के लिए उपयुक्त रखी गई, जैसे पांच हजार रुपये तक। फोनपे में अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाएं तथा गूगल पे की सादगी इसे पसंदीदा बनाती। कभी-कभी एक-दो प्रतिशत विदेशी मुद्रा शुल्क लग सकता, लेकिन यह पारंपरिक तरीकों से कहीं कम है।
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फायदे और संभावित चुनौतियां
इस व्यवस्था से समय की बचत के साथ सुरक्षा भी बढ़ी। रीयल टाइम सेटलमेंट से धोखाधड़ी का खतरा कम। पर्यटक अब भारी नोट संभालने या एटीएम की लाइनों से मुक्त। व्यापारिक यात्राओं में भी बड़े लेनदेन आसान। हालांकि हर दुकान पर क्यूआर उपलब्ध नहीं, इसलिए कार्ड या लोकल विकल्प बैकअप रखना बुद्धिमानी। इंटरनेट कनेक्टिविटी जरूरी होने से ग्रामीण इलाकों में सीमित। फिर भी, आगामी अपडेट्स से कवरेज बढ़ेगा।
भविष्य की संभावनाएं
2026 के बाद और अधिक देश जुड़ने की योजना है। यूपीआई वैश्विक भुगतान मानक बनने की ओर अग्रसर। भारतीय प्रवासी अब घर भेजने वाले पैसे भी इसी से आसानी से मंगा सकेंगे। डिजिटल इंडिया अभियान को नई गति मिलेगी, खासकर पंजाब जैसे व्यापारिक केंद्रों में। यह न केवल व्यक्तिगत सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यूपीआई का सफर अभी शुरू हुआ है, और यह पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा।















