उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। अब कक्षा 10वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले छात्रों को हर महीने 1000 रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी। यह योजना खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शुरू की गई है ताकि वे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में इसकी शुरुआत की और पहले चरण में करोड़ों रुपये छात्रों के खातों में हस्तांतरित किए। इससे गरीब घरों के अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

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शिक्षा को बढ़ावा देने वाली महत्वाकांक्षी योजना
यह छात्रवृत्ति योजना राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के मेधावी छात्रों को लक्षित करती है। इसका मकसद है कि पैसे की तंगी के कारण कोई बच्चा पढ़ाई न छोड़े। योजना के तहत कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के छात्रों को साल भर में 12,000 रुपये तक की मदद मिलेगी। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से भेजी जाएगी।
राज्य सरकार का अनुमान है कि इससे लाखों छात्र लाभान्वित होंगे। खास बात यह है कि यह सभी वर्गों के लिए खुली है, चाहे सामान्य हो या आरक्षित श्रेणी। ग्रामीण इलाकों में जहां परिवारों की मासिक आय बहुत कम होती है, वहां यह राशि किताबें, स्टेशनरी और कोचिंग के खर्च निकालने में बड़ी मदद करेगी। एक सरकारी स्कूल के छात्र ने कहा कि अब उसके पास नई किताबें खरीदने का बोझ कम हो जाएगा।
कौन ले सकता है योजना का लाभ?
इस योजना के हकदार वे छात्र हैं जो उत्तर प्रदेश के स्थायी निवासी हैं और सरकारी या मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ रहे हैं। परिवार की सालाना आय दो लाख रुपये से कम होनी चाहिए। पिछली कक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। साथ ही आधार कार्ड से लिंक बैंक खाता होना चाहिए। सभी दस्तावेज ऑनलाइन जमा करने पड़ेंगे, जिसमें आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और मार्कशीट शामिल हैं। परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को ही चयनित किया जाएगा, जो योजना को पारदर्शी बनाता है।
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आवेदन कैसे करें?
आवेदन पूरी तरह डिजिटल है। छात्रों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर वन टाइम रजिस्ट्रेशन कराना होगा। उसके बाद व्यक्तिगत जानकारी भरें, जरूरी कागजात अपलोड करें। स्कूल स्तर पर सत्यापन के बाद स्वीकृति मिल जाती है। आवेदन का समय आमतौर पर जुलाई से अक्टूबर तक रहता है। अगले साल के सत्र के लिए जल्द अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। रिन्यूअल के लिए पिछली कक्षा की मार्कशीट जमा करनी पड़ेगी। अगर कोई त्रुटि हो तो फॉर्म सुधारने का मौका भी मिलेगा। अभिभावक सलाह देते हैं कि समय रहते दस्तावेज तैयार रखें ताकि अंतिम समय में परेशानी न हो।
योजना का असर और भविष्य की उम्मीदें
यह पहल न सिर्फ छात्रों का हौसला बढ़ाएगी बल्कि ड्रॉपआउट दर को भी घटाएगी। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी योजनाओं से राज्य की साक्षरता दर में तेजी आएगी। पहले प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप चल रही थीं, लेकिन यह नई व्यवस्था उन्हें और मजबूत बनाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि हर योग्य बच्चे तक मदद पहुंचे। छात्रों को सलाह है कि कक्षा नौवीं से ही तैयारी शुरू कर दें।
परीक्षा का सिलेबस पिछले वर्षों के पेपर पर आधारित होगा। यह योजना गरीबी की जंजीरों को तोड़कर शिक्षा के द्वार खोलेगी। अगर आपका बच्चा योग्य है तो यह सुनहरा मौका हाथ से न जाने दें। अधिक अपडेट के लिए सरकारी पोर्टल पर नजर रखें।















