उत्तर प्रदेश सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग परीक्षण जैसे जघन्य अपराधों पर करारा प्रहार करने के लिए मुखबिर योजना को सक्रिय रूप से चला रही है। इस योजना के तहत कोई भी आम नागरिक सरकारी सिस्टम का हिस्सा बनकर अपराधियों की पुख्ता जानकारी दे सकता है और बदले में 2 लाख रुपये तक का नकद इनाम हासिल कर सकता है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।

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योजना का उद्देश्य
यह योजना खासतौर पर घटते लिंगानुपात को रोकने और समाज में बेटियों के महत्व को मजबूत करने के लिए शुरू की गई है। अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों, डॉक्टरों और बिचौलियों के गिरोहों पर नजर रखने के लिए आम जनता को खुफिया सहयोगी बनाया जाता है। जब कोई टीम ऐसी गतिविधियां पकड़ लाती है, तो न सिर्फ अपराधी बेनकाब होते हैं, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश भी मिलता है कि कानून की नजर हर जगह है।
टीम कैसे काम करती है?
मुखबिर योजना में तीन सदस्यीय टीम का गठन होता है। मुखबिर अपराध की सूचना देता है, एक महिला गर्भवती ग्राहक बनकर जाल बिछाती है, जबकि सहायिका पूरे ऑपरेशन में सहयोग करती है। इस टीम को कुल 2 लाख रुपये का इनाम मिलता है, जो तीन किस्तों में वितरित होता है। पहली किस्त छापेमारी के सफल होने पर, दूसरी कोर्ट पेशी पर और तीसरी सजा सुनाए जाने के बाद। इससे सुनिश्चित होता है कि मामला अंत तक मजबूत बने।
इनाम का बंटवारा
| भूमिका | इनाम राशि |
|---|---|
| मुखबिर (सूचना देने वाला) | 60,000 रुपये |
| गर्भवती भूमिका वाली महिला | 1,00,000 रुपये |
| सहायिका | 40,000 रुपये |
कौन बन सकता है मुखबिर?
उत्तर प्रदेश का कोई भी 18 वर्ष से अधिक आयु का स्थायी निवासी इस योजना से जुड़ सकता है। खास डिग्री या सरकारी नौकरी की जरूरत नहीं। बस आपके पास अपराध से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी होनी चाहिए, जैसे संदिग्ध क्लिनिक का नाम, पता, डॉक्टर या बिचौलिए की गतिविधियां। झूठी या निजी दुश्मनी वाली सूचना पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, इसलिए सिर्फ पुख्ता खबर ही दें।
कैसे दें सूचना? प्रक्रिया सरल
अपने जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय या स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी से संपर्क करें। गोपनीय रूप से जानकारी साझा करें जगह, समय और अन्य डिटेल्स स्पष्ट बताएं। विभाग पहले प्रारंभिक जांच करता है, फिर टीम गठित होकर स्टिंग ऑपरेशन चलाता है। कई जिलों में हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध हैं।
गोपनीयता की पूरी गारंटी
सूचना देने वाले का नाम, पता या पहचान कभी सार्वजनिक नहीं होती। रिकॉर्ड में कोड नंबर का इस्तेमाल होता है और केवल सीमित अधिकारी ही इससे अवगत रहते हैं। कोर्ट प्रक्रिया में भी गवाह सुरक्षा के प्रावधान हैं। योजना का मूल मंत्र साफ है, अपराधी खुले में आएगा, मुखबिर छिपा रहेगा।
सुनहरा अवसर, बड़ी जिम्मेदारी
मुखबिर योजना न सिर्फ आर्थिक लाभ का मौका है, बल्कि सामाजिक न्याय का हथियार भी। अगर आप आसपास अवैध गतिविधियां देखते हैं, तो आगे आएं। एक सूचना से न केवल बेटी की जान बच सकती है, बल्कि आपको सम्मान और इनाम दोनों मिलेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार अपराधमुक्त समाज के लिए जनता का इंतजार कर रही है।















