उत्तर प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा है। राज्य सरकार ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत फ्री टैबलेट और स्मार्टफोन बांटने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। हाल ही में जारी नई लाभार्थी सूची ने लाखों छात्रों में उत्साह भर दिया है। अब हर छात्र अपने कॉलेज स्तर पर नाम चेक कर वितरण की तारीख जान सकता है। यह योजना न केवल पढ़ाई को आसान बना रही है बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी कारगर साबित हो रही है।

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योजना का उद्देश्य और दायरा
यह पहल 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई थी। इसका मुख्य लक्ष्य ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, आईटीआई, डिप्लोमा और स्किल विकास कोर्स कर रहे छात्रों को आधुनिक तकनीक से लैस करना है। राज्य भर के सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी संस्थानों के करीब एक से डेढ़ करोड़ छात्र इससे जुड़ सकेंगे। डिवाइस में पहले से लोडेड स्टडी मटेरियल, ऑनलाइन क्लास एक्सेस और जॉब पोर्टल की सुविधा मिलेगी। अभी तक लाखों यूनिट्स वितरित हो चुकी हैं, जो डिजिटल डिवाइड को पाटने का माध्यम बने हुए हैं। छात्र इन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और कंटेंट क्रिएशन के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
कौन पात्र होगा, कैसे चेक करें नाम?
पात्रता के मानदंड सरल लेकिन सख्त हैं। आवेदक उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हो, दसवीं या बारहवीं में न्यूनतम 65 प्रतिशत अंक हासिल किए हों और परिवार की सालाना आय दो लाख रुपये से कम हो। अंतिम वर्ष के छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है। नाम जांचने के लिए डिजी शक्ति पोर्टल पर ई-केवाईसी के जरिए लॉगिन करें। वैकल्पिक रूप से कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट या नोटिस बोर्ड से पीडीएफ लिस्ट डाउनलोड कर रोल नंबर या एडमिशन नंबर से सर्च करें। कई संस्थानों ने जनवरी और जुलाई में वितरण पूरा किया, जबकि फरवरी तक प्रक्रिया जारी है।
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आवेदन और वितरण की पूरी प्रक्रिया
आवेदन डिजी शक्ति पोर्टल पर ऑनलाइन होता है। आधार कार्ड, मार्कशीट, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण, फोटो और एनरोलमेंट नंबर जैसे दस्तावेज अपलोड करें। ई-केवाईसी पूरा होने के बाद जिला स्तर की कमेटी सूची तैयार करती है। वितरण कॉलेजवार होता है, जहां प्राचार्य समय सारिणी जारी करते हैं। उदाहरण के तौर पर कुछ जगहों पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर सुबह से शाम तक क्रमवार वितरण हुआ। लखनऊ की एक प्रमुख यूनिवर्सिटी में गर्मियों से शुरुआत हो चुकी है। अगर नाम सूची में है तो तुरंत कॉलेज से संपर्क करें, क्योंकि स्टॉक सीमित होता है।
चुनौतियां और छात्रों की प्रतिक्रिया
कुछ छात्रों को विलंब या फर्जी लिस्ट की अफवाहों का सामना करना पड़ा, लेकिन आधिकारिक चैनलों पर भरोसा रखें। जालंधर जैसे क्षेत्रों से कंटेंट क्रिएटर्स भी इसकी तारीफ कर रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर अपडेट शेयर कर रहे हैं। योजना से छात्रों को ऑनलाइन लर्निंग, रील्स बनाना और फ्रीलांसिंग के नए अवसर मिले हैं। भविष्य में लैपटॉप वितरण की संभावना भी चर्चा में है।
आगे की राह
यह योजना डिजिटल इंडिया का सशक्त माध्यम बनेगी। सरकार का फोकस गुणवत्ता वाली शिक्षा और रोजगार पर है। छात्रों से अपील है कि आधिकारिक स्रोतों से जुड़ें और अवसर का लाभ उठाएं। डिजिटल सशक्तिकरण से उत्तर प्रदेश का हर कोना चमकेगा।















