भारत के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज आधार कार्ड में अब जन्मतिथि बदलना पहले जितना आसान नहीं रहा। सरकार ने हाल ही में सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत नया जन्म प्रमाण पत्र जमा करके तारीख में बदलाव कराना संभव नहीं होगा। अब केवल मूल जन्म प्रमाण पत्र की पंजीकरण संख्या में दर्ज सुधार ही मान्य माना जाएगा। यह कदम फर्जी दस्तावेजों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है, क्योंकि पहले लोग नौकरी या सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए उम्र में हेरफेर कर लिया करते थे।

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बदलाव की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ सालों में आधार केंद्रों पर जन्मतिथि सुधार के आवेदनों की बाढ़ आ गई थी। खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में लोग नया बर्थ सर्टिफिकेट बनवाकर आधार में कम उम्र दर्ज करा लेते थे। इससे न केवल डेटाबेस की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, बल्कि कई कानूनी विवाद भी हुए। अधिकारियों ने पाया कि 80 प्रतिशत से ज्यादा अपडेट अनुरोध इसी तरह के थे। इसलिए अब प्रक्रिया को पारदर्शी और सत्यापित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। मूल दस्तावेज में ही संशोधन कराना पहली शर्त बन गई है।
नए नियम क्या कहते हैं?
अब आधार में जन्मतिथि अपडेट के लिए जन्म प्रमाण पत्र का वही पुराना रजिस्ट्रेशन नंबर जरूरी है, जिसमें पहले दर्ज तारीख में आधिकारिक सुधार हो। अगर कोई नया प्रमाण पत्र पेश करता है, तो उसे खारिज कर दिया जाएगा। इसके अलावा अन्य दस्तावेज जैसे पासपोर्ट, दसवीं की मार्कशीट, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन वे भी पूरी तरह वेरीफाइड होने चाहिए। पहली बार का बदलाव सामान्य प्रक्रिया से हो सकता है, मगर दूसरी बार क्षेत्रीय UIDAI कार्यालय से विशेष अनुमति लेनी पड़ेगी। यह नियम फरवरी 2026 से पूरे देश में लागू हो चुका है।
प्रक्रिया कैसे पूरी करें?
सुधार के इच्छुक व्यक्ति को सबसे पहले नजदीकी आधार सेवा केंद्र पर पहुंचना होगा। वहां मूल दस्तावेज दिखाकर फॉर्म भरें। ऑनलाइन पोर्टल से नाम या पता तो बदला जा सकता है, लेकिन जन्मतिथि के लिए केंद्र जाना अनिवार्य है। आवेदन के बाद डिजिटल सत्यापन होता है, जो 30 से 90 दिनों तक लग सकता है। स्थिति की जांच UIDAI की वेबसाइट से की जा सकती है। ध्यान रखें, आधार केंद्रों पर अब हर दस्तावेज की गहन जांच होगी, इसलिए फर्जीवाड़े की कोशिश न करें।
आम लोगों पर प्रभाव
ये नियम वास्तविक गलतियों को ठीक करने वालों के लिए राहत हैं, लेकिन बार-बार बदलाव चाहने वालों के लिए रुकावट। झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जहां लंबी कतारें लगती थीं, वहां अब प्रक्रिया तेज लेकिन सख्त हो गई है। ग्रामीण निवासियों को जागरूकता की जरूरत है, ताकि वे अनावश्यक परेशानी से बचें। सरकार का उद्देश्य आधार को सबसे भरोसेमंद पहचान पत्र बनाना है, जो डिजिटल सेवाओं की नींव है।
आगे की सलाह
अगर आपके आधार में कोई त्रुटि है, तो देर न करें। पहले अपने जन्म प्रमाण पत्र को स्थानीय नगर निगम या पंचायत में सत्यापित कराएं। सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें और नियमित अपडेट जांचते रहें। यह बदलाव लंबे समय में फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि इससे आधार की साख और मजबूत होगी। नागरिकों को सतर्क रहकर ही लाभ मिलेगा।















