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Digital Land ID: हर खेत का बनेगा ‘डिजिटल आधार’, एक क्लिक में दिखेगा असली मालिक का नाम पता

क्या आपकी जमीन का असली मालिक कौन? सरकार ला रही डिजिटल आधार, किसान खुश। विवाद दूर, लोन आसान, मुआवजा तुरंत। दिल्ली से शुरू, पूरे देश में धूम! जानिए कैसे बदलेगी किसानों की किस्मत।

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भारत सरकार ने भूमि रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब देश के हर खेत और भूखंड को आधार कार्ड की तर्ज पर एक यूनिक डिजिटल पहचान मिलेगी। इस डिजिटल लैंड आईडी से मालिक का नाम, पता, जमीन का आकार और सटीक स्थान की जानकारी मोबाइल या कंप्यूटर पर तुरंत मिल जाएगी। यह बदलाव किसानों और संपत्ति मालिकों के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है।

Digital Land ID: हर खेत का बनेगा ‘डिजिटल आधार’, एक क्लिक में दिखेगा असली मालिक का नाम पता

भूमि विवादों का अंत होगा आसान

लंबे समय से चली आ रही समस्या रही है कि जमीन के मालिकाना हक को साबित करना मुश्किल होता था। तहसील कार्यालयों के चक्कर कटवाते हुए लोग महीनों इंतजार करते थे। लेकिन अब यह डिजिटल सिस्टम विवादों को कम करने में कारगर साबित हो रहा है। एक 14 अंकों वाली यूनिक आईडी हर भूखंड को अलग पहचान देगी। इससे नकली दस्तावेजों का खेल रुकेगा और असली मालिक की पहचान पल भर में हो जाएगी। किसान घर बैठे ऐप के जरिए अपनी जमीन चेक कर सकेंगे।

कैसे काम करेगी यह व्यवस्था?

यह पहल डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम का हिस्सा है। इसके तहत पूरे देश में सर्वे हो रहा है। ड्रोन और जीपीएस तकनीक से खेतों की सटीक मैपिंग की जा रही है। हर आईडी के साथ जमीन का इतिहास जुड़ा रहेगा, जिसमें खरीद-बिक्री, उत्तराधिकार सब दर्ज होगा। ग्रामीण इलाकों में पहले से ही लाखों खेतों को यह आईडी दी जा चुकी है। शहरी क्षेत्रों में भी प्लॉट्स को इसी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है।

राज्यों में तेजी से लागू हो रही योजना

कई राज्य इस मोर्चे पर आगे हैं। गुजरात, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने करोड़ों भूखंडों को डिजिटल आईडी प्रदान कर दी है। दिल्ली में भी हाल ही में घोषणा हुई कि राजधानी की हर जमीन को लैंड आधार कार्ड मिलेगा। एक गांव में पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, जहां सैकड़ों आईडी तैयार हो चुकी हैं। केंद्र सरकार ने इसके लिए भारी बजट आवंटित किया है। अगले साल तक पूरे देश में इसे पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य है।

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किसानों को क्या-क्या फायदे मिलेंगे?

इससे सबसे ज्यादा लाभ किसानों को होगा। भूमि अधिग्रहण या प्राकृतिक आपदा में मुआवजा तुरंत उनके खाते में पहुंचेगा। बैंक लोन लेना आसान हो जाएगा, क्योंकि जमीन का रिकॉर्ड साफ होगा। बेनामी सौदे रुकेंगे और अवैध कब्जे पर लगाम लगेगी। अदालतों में लंबित जमीन विवाद तेजी से निपट सकेंगे। रियल एस्टेट कारोबार भी सुगम होगा। खरीदार को प्लॉट खरीदने से पहले सब कुछ ऑनलाइन जांचने का मौका मिलेगा।

चुनौतियां बरकरार, लेकिन उम्मीदें बंधीं

कुछ जगहों पर सर्वे और डेटा अपलोड में देरी की शिकायतें हैं। लेकिन सरकार का दावा है कि तकनीकी सहायता से यह जल्द ठीक हो जाएगा। किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और जीडीपी को बल मिलेगा।

कुल मिलाकर यह डिजिटल आधार न केवल जमीन को सुरक्षित बनाएगा, बल्कि देश के विकास को नई गति देगा। किसान और आम नागरिक अब पारदर्शी सिस्टम के सहारे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। सरकार की यह पहल डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर है।

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info@divcomkonkan.in

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