राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर जाम की समस्या हर यात्री को परेशान करती है। लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के स्पष्ट नियमों के तहत अगर वाहनों की कतार 100 मीटर से लंबी हो जाए, तो आपको एक रुपया भी टोल के नाम पर नहीं देना पड़ता। यह नियम यात्रियों के समय और धैर्य की रक्षा के लिए बनाया गया है, जो 2021 से प्रभावी है और आज भी पूरी तरह लागू है।

Table of Contents
10 सेकंड और 100 मीटर का नियम क्या कहता है?
NHAI की टोल प्लाजा प्रबंधन नीति में हर लेन के लिए 10 सेकंड में टोल वसूली का सख्त मानक तय किया गया है। प्लाजा से ठीक 100 मीटर पीछे एक पीली लाइन खींची जाती है, जो कतार की सीमा दर्शाती है। जैसे ही वाहनों की लाइन इस पीली लाइन को पार कर लेती है, सभी वाहन बिना किसी भुगतान के आगे बढ़ सकते हैं। यह छूट तब तक बनी रहती है, जब तक कतार की लंबाई 100 मीटर से कम न हो जाए।
फास्टैग सिस्टम आने के बाद भी पीक आवर्स में जाम की शिकायतें कम नहीं हुईं। इसलिए यह प्रावधान जाम को तुरंत कम करने और यात्रियों की रफ्तार बहाल करने के मकसद से है। नए प्लाजा पर कभी-कभी छूट सीमित रखी जाती है, लेकिन पुराने और मौजूदा प्लाजा पर इसका पालन अनिवार्य है। इससे वाहनों की औसत गति 30-40 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
Also Read- Gratuity new rule: अब 1 साल में भी मिल जाएगी ग्रेच्युइटी, लेकिन किसे और कितनी?
अपने अधिकार कैसे लागू करें?
अपने हक का इस्तेमाल करना आसान है। सबसे पहले प्लाजा से 100 मीटर पीछे लगी पीली लाइन को ध्यान से देखें। अगर आपकी गाड़ी उससे आगे आ गई है, तो बिना रुके सीधे आगे बढ़ें। अगर टोल कर्मचारी रोकने की कोशिश करें, तो शांति से नियम की जानकारी दें और स्थिति का फोटो या वीडियो रिकॉर्ड करें।
शिकायत दर्ज करने के लिए NHAI की हेल्पलाइन नंबर 1033 पर कॉल करें या उनके मोबाइल ऐप पर तुरंत रिपोर्ट फाइल करें। कई बार स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हैं। यह अधिकार सभी वाहनों पर लागू होता है, चाहे कार हो, ट्रक हो या बस।
अन्य महत्वपूर्ण टोल संबंधी अधिकार
टोल प्लाजा पर और भी कई अधिकार हैं जो जानना जरूरी है। अगर आपका फास्टैग ब्लैकलिस्ट हो गया है, तो UPI से 25 प्रतिशत अतिरिक्त राशि देकर पास प्राप्त कर सकते हैं। नियमों के मुताबिक, दो टोल प्लाजा के बीच कम से कम 60 किलोमीटर का फासला होना चाहिए, वरना शिकायत करें। 1 अप्रैल 2026 से टोल पर कैश पूरी तरह बंद हो जाएगा और सिर्फ डिजिटल पेमेंट ही चलेगा।
मल्टी-लेन फ्री-फ्लो सिस्टम वाले प्लाजा पर तो बिना रुके ही टोल कट जाता है, न कोई बैरियर होता है न कर्मचारी। स्थानीय वाहनों, विकलांगों और आपातकालीन सेवाओं को पहले से ही छूट मिलती है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
टोल ऑपरेटरों पर जवाबदेही तभी बनेगी, जब यात्री अपने अधिकारों से वाकिफ होंगे। अगली बार हाईवे पर जाम देखें, तो घबराएं नहीं पीली लाइन चेक करें और बेझिझक आगे बढ़ें। सुरक्षित और तेज सफर के लिए ये छोटे-छोटे नियम बड़ी राहत साबित हो सकते हैं। अब टोल प्लाजा पर समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं।















