विंड पावर की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयर हालिया तिमाही नतीजों के बाद दबाव में हैं। ब्रोकरेज फर्में लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर भरोसा जता रही हैं, लेकिन प्रोजेक्ट देरी से लक्ष्य मूल्य घटाए। शुक्रवार को शेयर 1.2 प्रतिशत गिरकर 47.28 रुपये पर बंद, बाजार पूंजीकरण 65,000 करोड़ रुपये के करीब। पिछले 30 दिनों में 10 प्रतिशत की गिरावट, 52 सप्ताह के उच्चतम 74.30 रुपये से 36 प्रतिशत नीचे।

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लाभ और राजस्व में उछाल
दिसंबर 2025 तिमाही में कंपनी ने वित्तीय मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन किया। शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़कर 445.2 करोड़ रुपये रहा। राजस्व 42.4 प्रतिशत की रफ्तार से 4,228 करोड़ रुपये तक पहुंचा। EBITDA में 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 730.5 करोड़ रुपये पर आ गया, मार्जिन लगभग 17.3 प्रतिशत सुधरा। 617 मेगावाट की डिलीवरी ने नतीजों को बल दिया। तिमाही अंत में नेट नकदी स्थिति 1,556 करोड़ रुपये की मजबूत बनी, जो बैलेंस शीट को सपोर्ट दे रही है। बेहतर ऑर्डर संयोजन ने ग्रोथ को सहारा दिया।
जमीनी चुनौतियां
हालांकि वित्तीय आंकड़े चमकदार हैं, प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन में बाधाएं बरकरार। पिछले सात तिमाहियों में 3,175 मेगावाट डिलीवर किए गए, लेकिन केवल 778 मेगावाट ही चालू हो पाए। जमीन उपलब्धता, रास्ता अधिकार और ग्रिड कनेक्टिविटी जैसी समस्याओं ने गति रोकी। ऑर्डर बुक फिर भी 6.4 गीगावाट का मजबूत आधार है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 60 प्रतिशत सालाना ग्रोथ का मार्गदर्शन बरकरार रखा, चौथी तिमाही में 850 मेगावाट एक्जीक्यूशन की उम्मीद जताई।
ब्रोकरेज की राय
जेएम फाइनेंशियल ने वित्त वर्ष 2027-28 की डिलीवरी अनुमानों में हल्की कटौती की, लेकिन खरीदारी रेटिंग पर कायम रहते हुए लक्ष्य मूल्य 70 से घटाकर 64 रुपये किया। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने साइट संबंधी दिक्कतों का हवाला देकर लक्ष्य 60 से 55 रुपये पर लाया। क्लाइंट ऑफटेक 15-20 प्रतिशत कम रहा, फिर भी खरीदारी सुझाव intact। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनौतियां अस्थायी हैं, रिन्यूएबल एनर्जी बूम से कंपनी फायदा उठाएगी। निवेशक क्या करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।















