झारखंड सरकार ने युवाओं की उच्च शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अब राज्य के छात्र बिना किसी गारंटी के 15 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण हासिल कर सकेंगे। यह कदम आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी बच्चों को नामी संस्थानों तक पहुंचाने में कारगर साबित हो रहा है। गरीबी की जंजीरों से बंधे छात्र अब इंजीनियरिंग, मेडिकल या मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ सकेंगे।

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मुख्यमंत्री का विजन, शिक्षा सबका अधिकार
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने व्यक्तिगत रूप से इस योजना को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। उनके नेतृत्व में शुरू हुई यह व्यवस्था छात्रों को मात्र 4 प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराती है। कोर्स पूरा होने के बाद एक साल की मोहलत मिलती है और कुल 15 साल की चुकौती अवधि होती है। राज्य के किसी मान्यता प्राप्त स्कूल से 10वीं और 12वीं पास करने वाले छात्र ही इसके हकदार हैं। परिवार की सालाना कमाई 2 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। इससे ग्रामीण इलाकों के हजारों युवा लाभान्वित हो रहे हैं, जो पहले बैंक के चक्कर लगाते थक जाते थे।
क्या मिलेगा इससे फायदा?
योजना के तहत ऋण का 70 प्रतिशत कोर्स फीस भरने और 30 प्रतिशत रहने-खाने तथा किताबों पर खर्च करने की छूट है। 4 लाख तक के ऋण पर कोई मार्जिन मनी नहीं लगती। छात्रों को विशेष ई-कार्ड भी जारी होता है, जिससे लेन-देन आसान हो जाता है। प्रोसेसिंग फीस का बोझ भी नहीं। विभिन्न बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई और केनरा बैंक इसमें जुड़े हैं। लॉन्च के बाद से हजारों आवेदन आ चुके हैं और सैकड़ों छात्रों को करोड़ों का ऋण स्वीकृत हो चुका है। एक छात्र ने कहा कि यह मेरे लिए नया जीवन है, अब आईआईटी का सपना सच होगा।
ऑनलाइन आवेदन
आवेदन बेहद सरल है। आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें। आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, प्रवेश पत्र और बैंक विवरण अपलोड करें। फॉर्म भरने के 15 दिनों में स्वीकृति मिल जाती है। हेल्पलाइन नंबरों पर तुरंत मदद उपलब्ध है। हाल ही में डैशबोर्ड और चैटबॉट सुविधा भी जोड़ी गई, जिससे आवेदन की स्थिति ट्रैक की जा सकती है। जिला स्तर पर कैंप भी लग रहे हैं, ताकि हर कोने तक जानकारी पहुंचे।
अन्य राज्यों से अलग क्यों
देशभर में कई योजनाएं हैं, लेकिन झारखंड की यह सबसे उदार है। पड़ोसी राज्यों में ऋण सीमा कम है और ब्याज अधिक। केंद्र सरकार की समान पहल भी चल रही है, पर राज्य का फोकस स्थानीय जरूरतों पर है। शिक्षा विभाग का दावा है कि 2026 तक एक लाख छात्र इससे जुड़ेंगे। यह न केवल व्यक्तिगत उन्नति बल्कि राज्य के विकास का आधार बनेगी।
चुनौतियां दूर करने की कवायद
जागरूकता फैलाने और दस्तावेज सत्यापन तेज करने पर काम चल रहा है। भविष्य में विदेशी पढ़ाई को भी शामिल करने की योजना है। छात्रों से अपील है कि देर न करें, तुरंत आवेदन करें। यह योजना झारखंड को शिक्षा का नया केंद्र बनाएगी, जहां हर बच्चे का भविष्य उज्ज्वल हो। अधिक जानकार के लिए वेबसाइट चेक करें।















