सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा एक संदेश लाखों कंटेंट क्रिएटर्स के दिलों में उम्मीद जगा रहा है। क्या आप रील्स या वीडियो बनाते हैं तो भारत सरकार आपको पेंशन और बीमा देगी यह दावा सुर्खियां बटोर रहा है। युवा क्रिएटर्स उत्साहित हैं कि उनकी डिजिटल मेहनत को आखिर मान्यता मिलेगी। लेकिन गहराई से समझने पर साफ होता है कि यह कोई नई सीधी योजना नहीं बल्कि मौजूदा कल्याण योजनाओं का गलत प्रचार है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बनी स्कीम्स कंटेंट मेकर्स को लाभ पहुंचा सकती हैं पर शर्तें जुड़ी हैं।

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क्या कहता है वायरल क्लेम?
फेसबुक इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर घूम रहे पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रील्स वीडियो या शॉर्ट कंटेंट बनाने वालों को सीधे पेंशन मिलेगी। सरकारी लोगो और घोषणा शैली से लगता है जैसे केंद्र सरकार ने खास योजना शुरू की हो। लाखों व्यूज वाले ये वीडियोज युवाओं को तुरंत रजिस्ट्रेशन की सलाह देते हैं। लेकिन हकीकत में ऐसी कोई नामी योजना अस्तित्व में नहीं है। यह भ्रम गिग इकॉनमी के विस्तार और श्रमिक कल्याण पहलों से जुड़ा है।
असंगठित श्रमिकों की e-Shram योजना
कंटेंट क्रिएटर्स गिग वर्कर्स की तरह आते हैं जिनका काम प्लेटफॉर्म आधारित होता है। सरकार ने e-Shram पोर्टल बनाया है जो असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों का डेटाबेस तैयार करता है। यहां रजिस्टर करने पर यूनिक कार्ड मिलता है जो विभिन्न सरकारी लाभों का गेटवे है। 18 से 40 साल के लोग आवेदन कर सकते हैं बशर्ते आय 15 हजार मासिक से कम हो। आधार मोबाइल और बैंक डिटेल्स से रजिस्ट्रेशन होता है जो मुफ्त है। सीएससी सेंटर या ऑनलाइन आसानी से पूरा हो जाता है।
पेंशन और बीमा के लाभ कैसे मिलें?
60 साल की उम्र के बाद हर महीने 3000 रुपये पेंशन का प्रावधान है। लेकिन यह मुफ्त नहीं बल्कि स्वैच्छिक योगदान पर टिका है। शुरुआती उम्र में कम राशि जमा करने पर सरकार बराबर का योगदान जोड़ती है। मृत्यु पर दो लाख का बीमा और आंशिक अक्षमता में एक लाख की सहायता भी मिलती है। पति-पत्नी दोनों को कार्ड बनवाने पर लाभ पार्टनर को ट्रांसफर हो जाता है। इसके अलावा स्किल ट्रेनिंग लोन और अन्य स्कीम्स से लिंक होता है।
राज्यों की अलग पहलें
कुछ राज्य जैसे उत्तर प्रदेश आगे बढ़े हैं। वहां डिजिटल मीडिया पॉलिसी से क्रिएटर्स को सरकारी प्रचार के लिए मासिक लाखों रुपये कमाने का मौका मिलता है। फॉलोअर्स की संख्या पर निर्भर यह राशि पेंशन नहीं बल्कि प्रोत्साहन है। केंद्र स्तर पर फोकस गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देना है न कि मुफ्त पेंशन बांटना। श्रमिक संहिता के तहत प्लेटफॉर्म कंपनियां योगदान देंगी।
क्रिएटर्स क्या करें?
रील्स बनाने वाले आज ही e-Shram.gov.in पर जाएं। मोबाइल नंबर से ओटीपी वेरिफाई कर डिटेल्स भरें। अपलोड होने पर डिजिटल कार्ड डाउनलोड करें। योगदान शुरू करें ताकि भविष्य सुरक्षित हो। जागरूकता की कमी से कई लोग वायरल ट्रैप में फंसते हैं। सत्यापन के बिना फॉरवर्ड न करें। सरकार असंगठित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना चाहती है लेकिन व्यक्तिगत योगदान जरूरी है। युवा क्रिएटर्स अपनी कमाई के साथ सुरक्षा का इंतजाम करें। यह डिजिटल इंडिया का सच्चा लाभ है।
आगे की राह
गिग इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। आने वाले समय में और योजनाएं जुड़ेंगी। तब तक मौजूदा सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करें। वायरल दावों से सावधान रहें। सही जानकारी ही असली ताकत है।















