सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड चल निकला है। असंगठित मजदूरों के बीच ई-श्रम कार्ड को लेकर खासी सरगर्मी है। कई वीडियो और पोस्ट दावा कर रहे हैं कि कार्ड बनवाने वाले हर महीने तीन हजार रुपये पा लेंगे। बुढ़ापे की चिंता हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी, बस एक छोटा सा काम कर लें। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। यह खबरें लोगों को गुमराह करने वाली हैं। असल में ई-श्रम कार्ड श्रमिकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का जरिया है, न कि मुफ्त पैसे का सोर्स।

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योजना की शुरुआत और मकसद
यह पोर्टल साल 2021 में शुरू हुआ था। इसका लक्ष्य देश के करोड़ों असंगठित कामगारों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, घरेलू नौकरानी जैसे लोग इससे जुड़ सकते हैं। कार्ड मिलने पर स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा जैसे फायदे हाथ लगते हैं। लेकिन तत्काल नकद मदद या मासिक पेंशन का वादा झूठा है। जो लोग बिना योगदान के तीन हजार रुपये की बात करते हैं, वे भ्रम फैला रहे हैं। वास्तविक पेंशन 60 साल की उम्र के बाद मिलती है और उसके लिए अभी से बचत करनी पड़ती है।
असली फायदे क्या हैं?
कार्ड धारक दो लाख तक का दुर्घटना बीमा पा सकते हैं। परिवार को आपात स्थिति में आर्थिक सहारा मिलता है। आने वाली सरकारी स्कीम्स का लाभ सीधे पहुंचेगा। मातृत्व सहायता, बच्चों की पढ़ाई या घर बनाने में मदद संभव है। लेकिन ये सब कार्ड बनने से अपने आप नहीं मिलते। अलग-अलग योजनाओं में आवेदन भरना पड़ता है। पेंशन स्कीम के तहत मासिक योगदान जरूरी है। 18 से 40 साल के लोग अभी शुरू करें तो बुढ़ापे में तीन हजार रुपये पक्के हैं। यह प्रक्रिया लंबी है, कोई शॉर्टकट नहीं।
पात्रता के नियम
हर कोई कार्ड नहीं बना सकता। उम्र 16 से 59 साल के बीच होनी चाहिए। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले ही लागू होते हैं। आयकर भरने वाले या सरकारी नौकरी वाले बाहर। आधार और बैंक खाता लिंक होना चाहिए। कोई स्थायी पेंशन न ले रहे हों। ये शर्तें पूरी करने पर ही रजिस्ट्रेशन होता है। गलत जानकारी देने पर कार्ड रद्द हो सकता है।
आवेदन कैसे करें?
आसान तरीका है। सरकारी वेबसाइट पर जाकर आधार नंबर डालें। ओटीपी आएगा, सत्यापन करें। यूनिक नंबर मिलेगा। सीएससी सेंटर पर मुफ्त मदद लें। पेंशन के लिए अलग पोर्टल पर नाम भरो। फर्जी ऐप्स या लिंक्स से बचें। कई लोग फॉर्म भरवाकर पर्सनल डिटेल चुरा लेते हैं। नजदीकी ई-मित्र या पंचायत से सलाह लें।
अफवाहों से सावधान
यूट्यूब और फेसबुक पर लाखों व्यूज वाले वीडियो क्लिकबैट हैं। वे पैसे कमाने के लिए झूठ बोलते हैं। सरकार ने बार-बार चेताया है। आधिकारिक साइट ही भरोसेमंद है। पंजाब जैसे राज्यों में लाखों कार्ड बने, लेकिन स्कैम के शिकार भी हुए। जागरूकता फैलाएं। असली सुरक्षा अभी से प्लानिंग में है। मजदूर भाइयों, अफवाह न पालें। सही कदम उठाएं, भविष्य सुरक्षित होगा।















