Join Youtube

NSE IPO: निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी! 10 साल बाद SEBI से मिली मंजूरी, अब मचेगी धूम।

SEBI ने NSE के लंबे इंतजार वाले IPO को हरी झंडी दे दी! NOC मिलने के बाद मार्च तक ड्राफ्ट पेपर दाखिल हो सकता है। दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंज NSE के शेयरों में निवेशकों की भारी रुचि। अनलिस्टेड मार्केट में कीमतें 10-15% चढ़ीं। रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए ऐतिहासिक मौका!

Published On:
sebi gives noc for nse ipo clearing path for listing in share market

शेयर बाजार से जुड़ी दुनिया में इन दिनों एक बड़ी हलचल मची है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को आखिरकार भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए मंजूरी मिल गई है। SEBI ने NSE को नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर दिया है, जिसका मतलब है कि अब एक्सचेंज के पब्लिक होने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।

लंबे समय से निवेशक इस IPO का इंतजार कर रहे थे। अब उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों में NSE के IPO में आवेदन करने का मौका मिल सकता है।

एक दशक लंबा इंतजार खत्म होने की कगार पर

NSE पिछले करीब दस साल से अपनी लिस्टिंग की तैयारी में जुटा हुआ था। कई बार ड्राफ्ट प्लान बने, आंतरिक बदलाव हुए, लेकिन नियामकीय मंजूरी नहीं मिल रही थी। इस दौरान एक्सचेंज ने अपने कामकाज में सुधार, पारदर्शिता बढ़ाने और सिस्टम को दुरुस्त करने पर खास जोर दिया। बीच-बीच में इसे कई तरह की नियामकीय जांचों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन अब SEBI की NOC यह संकेत देती है कि एक्सचेंज अपने पुराने मुद्दों से काफी हद तक निकल चुका है और आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

NSE की चेयरपर्सन की प्रतिक्रिया

NSE की चेयरपर्सन श्री श्रीनिवास इंजेटी ने SEBI की मंजूरी पर खुशी जताते हुए इसे एक्सचेंज की विकास यात्रा का अहम पड़ाव बताया। उनके मुताबिक, यह सिर्फ IPO की अनुमति नहीं है, बल्कि उन सभी प्रयासों की आधिकारिक मान्यता भी है जो NSE ने पिछले वर्षों में गवर्नेंस सुधारने और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने के लिए किए हैं।

उन्होंने यह भी इशारा किया कि IPO के जरिए NSE अपने सभी स्टेकहोल्डर्स – निवेशक, शेयरधारक, पार्टनर और कर्मचारियों – के लिए वैल्यू क्रिएशन का नया अध्याय शुरू करना चाहता है।

कब तक आ सकता है NSE का IPO?

अब जबकि SEBI की ओर से हरी झंडी मिल चुकी है, अगला बड़ा कदम होगा IPO के स्ट्रक्चर और टाइमलाइन को अंतिम रूप देना। फिलहाल NSE की ओर से आधिकारिक तारीखों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बाजार के जानकारों और पूर्व रिपोर्टों के अनुसार, एक्सचेंज मार्च के आसपास अपने ड्राफ्ट लिस्टिंग डॉक्यूमेंट दाखिल कर सकता है।

इसके लिए NSE इन्वेस्टमेंट बैंकरों और लॉ फर्मों के साथ मिलकर ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) की फाइन ट्यूनिंग में जुटा हुआ है। जैसे ही ड्राफ्ट पेपर फाइल होंगे, उसके बाद अगले चरणों की तस्वीर और साफ होगी।

क्यों खास है NSE का IPO?

NSE का IPO कोई सामान्य पब्लिक इश्यू नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए एक ऐतिहासिक इवेंट समझा जा रहा है। इसके पीछे कई वजहें हैं:

  • NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।
  • डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम के लिहाज से यह दुनिया के सबसे बड़े एक्सचेंजों में शुमार है।
  • इसके प्लेटफॉर्म पर रोजाना लाखों ट्रेड्स होते हैं, जिन पर देशभर के रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स निर्भर रहते हैं।

इसी कारण एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि इसका IPO आने पर घरेलू और विदेशी दोनों तरह के निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स देखने को मिल सकता है।

पुराने विवाद और मौजूदा स्थिति

NSE की लिस्टिंग में सबसे बड़ा रोड़ा इसके को-लोकेशन सुविधा से जुड़े विवाद और गवर्नेंस इश्यू रहे हैं। 2016 के बाद से इस मामले में कई तरह की जांचें चलीं और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

पिछले साल NSE ने इस विवाद को सुलझाने के लिए लगभग 1,387 करोड़ रुपये का सेटलमेंट ऑफर रखा था। इसके साथ ही, गवर्नेंस सुधार, सिस्टम अपग्रेड और रेगुलेटरी कंब्लायंस पर फोकस बढ़ाया गया। अब, SEBI की ओर से NOC मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नियामकीय माहौल अब अधिक सहयोगी और स्पष्ट हो चुका है।

रेगुलेटरी माहौल में बदलाव

हाल के वर्षों में SEBI ने बड़ी कंपनियों के लिए पब्लिक फ्लोट से जुड़े नियमों में कुछ लचीलापन दिखाया है। पहले जहां बहुत कड़े मानदंड हुआ करते थे, वहीं अब बड़े एक्सचेंज जैसी कंपनियों के लिए व्यवहारिक नियम बनाए जा रहे हैं, ताकि मजबूत कंपनियां भी पब्लिक मार्केट में आकर पूंजी जुटा सकें और निवेशकों को उनमें हिस्सेदारी मिल सके।

NSE की मंजूरी को इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा भी माना जा सकता है, जहां रेगुलेटर सख्ती और विकास – दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

अनलिस्टेड मार्केट में पहले से गर्म माहौल

NSE के IPO की चर्चा पिछले कुछ समय से अनलिस्टेड मार्केट में पहले ही माहौल गर्म कर चुकी है। जो निवेशक प्री-IPO शेयर्स में डील करते हैं, उनके बीच NSE के शेयरों की डिमांड लगातार बढ़ती दिख रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दो महीनों में अनलिस्टेड स्पेस में NSE के शेयर्स की कीमतों में लगभग 10–15% तक उछाल आया है। फिलहाल इसके करीब 1,77,000 से ज्यादा निवेशक अनलिस्टेड शेयर होल्ड कर रहे हैं, जो इसे भारत की सबसे व्यापक रूप से होल्ड की जाने वाली अनलिस्टेड कंपनियों में से एक बनाता है।

रिटेल निवेशकों के लिए इसका मतलब क्या?

अगर आप एक रिटेल इन्वेस्टर हैं और शेयर बाजार से जुड़े रहते हैं, तो NSE का IPO आपके लिए एक यूनिक मौका साबित हो सकता है। आम तौर पर हम एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों के शेयर खरीदते हैं, लेकिन इस बार मौका खुद उस प्लेटफॉर्म में हिस्सेदारी लेने का है, जहां बाकी सभी कंपनियां लिस्ट होती हैं।

हालांकि, किसी भी IPO की तरह इसमें भी निवेश से पहले प्रॉस्पेक्टस पढ़ना, वैल्यूएशन समझना, जोखिमों का आकलन करना और अपनी रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से निर्णय लेना जरूरी रहेगा। बड़े नाम का मतलब हमेशा बिना रिस्क वाला निवेश नहीं होता, इसलिए सजग रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

Author
info@divcomkonkan.in

Leave a Comment

🔥 वायरल विडिओ देखें