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School Bag Weight Rule: बच्चों के बैग का वजन कितना होना चाहिए? जानें सरकार की गाइडलाइन

बच्चों के कंधे भारी बैग से टूट रहे थे। अब सरकार ने सख्त नियम बना दिए। क्लास के हिसाब से वजन तय, स्कूलों में तौलना जरूरी। पीठ दर्द और बीमारियां दूर होंगी। माता-पिता चौंक जाएंगे जानकर। पूरी डिटेल पढ़ें!

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स्कूल बैग का भारी वजन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। सरकार ने अब सख्त कदम उठाते हुए स्कूल बैग के वजन पर स्पष्ट सीमाएं तय कर दी हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को पीठ दर्द, रीढ़ की हड्डी की समस्या और थकान से बचाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना भारी बैग उठाने से बच्चों का शारीरिक विकास बाधित हो रहा था। नए दिशानिर्देशों के तहत बैग का वजन छात्र के शरीर के वजन का अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही रखा जा सकेगा।

School Bag Weight Rule: बच्चों के बैग का वजन कितना होना चाहिए? जानें सरकार की गाइडलाइन

क्लास के अनुसार निर्धारित वजन सीमाएं

हर कक्षा के लिए अलग-अलग वजन सीमा तय की गई है ताकि छोटे बच्चों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। प्री-प्राइमरी के छात्रों को कोई बैग लाने की जरूरत नहीं। पहली और दूसरी कक्षा के लिए अधिकतम 1.5 से 2.2 किलोग्राम, तीसरी से पांचवीं तक 2 से 3 किलोग्राम, छठी से सातवीं 2 से 3 किलोग्राम, आठवीं कक्षा के लिए 2.5 से 4 किलोग्राम, नौवीं से दसवीं 4 से 4.5 किलोग्राम और ग्यारहवीं-बारहवीं के लिए 5 किलोग्राम तक अनुमति है। ये सीमाएं ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों की सिफारिशों पर आधारित हैं।

स्कूलों के लिए अनिवार्य व्यवस्थाएं

स्कूल प्रबंधनों को अब डिजिटल वजन मशीनें अनिवार्य रूप से लगानी होंगी। हर दिन बैग का वजन जांचा जाएगा। लॉकर की व्यवस्था कर किताबें स्कूल में ही रखी जा सकेंगी। दैनिक समय-सारिणी ऐसी बनानी होगी कि सभी किताबें एक साथ न लानी पड़ें। केवल अनुमोदित पाठ्यपुस्तकें ही इस्तेमाल होंगी। होमवर्क पर भी पाबंदी है: पहली-दूसरी कक्षा में कोई होमवर्क नहीं, तीसरी-पांचवीं में बहुत हल्का। इन उपायों से स्कूल बैग हल्का रह सकेगा।

स्वास्थ्य पर भारी बैग का बुरा असर

लंबे समय तक भारी बैग ढोने से बच्चों की पीठ मुड़ सकती है, कंधे में दर्द रहता है और चलने-फिरने में परेशानी होती है। छोटे उम्र में ही जोड़ों पर दबाव पड़ने से भविष्य में गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। डॉक्टर बताते हैं कि औसतन 20-25 किलोग्राम वजन का बच्चा 5-7 किलोग्राम का बैग उठाता है, जो उसके शरीर के लिए नुकसानदेह है। हल्के बैग से बच्चे सक्रिय रहेंगे, खेलने का समय मिलेगा और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित होगा।

जमीनी स्तर पर चुनौतियां और समाधान

कई स्कूल अभी भी अतिरिक्त किताबें या सामग्री थोपते हैं, जिससे नियम टूटते हैं। अभिभावकों को जागरूक रहना होगा। वे घर पर ही बच्चे के बैग का वजन तौलें। 20 किलोग्राम वजन वाले बच्चे का बैग 2 किलोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। सरकार ने चेतावनी दी है कि उल्लंघन पर स्कूलों की मान्यता रद्द हो सकती है। कई राज्यों में मासिक रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। अभिभावक संगठन मांग कर रहे हैं कि वजन मशीनें स्कूलों को सब्सिडी पर दी जाएं।

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार

ये नियम न केवल स्वास्थ्य सुधारेंगे, बल्कि शिक्षा को बेहतर बनाएंगे। बच्चे तरोताजा होकर कक्षा में बैठेंगे। समय-सारिणी से किताबें बांटकर लानी होंगी, जिससे फोकस बढ़ेगा। सभी बोर्डों पर एकसमान लागू होने से देशव्यापी बदलाव आएगा। अभिभावक इस बदलाव का स्वागत कर रहे हैं। हल्का बैग न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित होगा। सरकार का लक्ष्य 2026 तक पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना है।

Author
info@divcomkonkan.in

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