देश की तेज रफ्तार वाली अर्थव्यवस्था में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का बोलबाला है, लेकिन सरिया यानी TMT बार के बढ़ते दामों ने सबके माथे पर बल डाल दिए हैं। पिछले कुछ महीनों में दिल्ली से लेकर मुंबई तक सरिया के भावों में जबरदस्त उछाल आया है। जहां पहले एक टन सरिया की कीमत मध्यम स्तर पर थी, अब यह काफी ऊंची हो चुकी है। इससे मकान बनवाने का सपना देख रहे लाखों परिवारों को भारी पड़ रहा है। निर्माण सामग्री का यह अहम हिस्सा महंगा होने से कुल बजट पर गहरा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड कुछ समय और बना रह सकता है।

Table of Contents
प्रमुख शहरों में हालात
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सरिया के छोटे आकार के पीस की कीमत प्रति किलो आधार पर बढ़ी है, जबकि बड़े ब्रांड्स के मोटे बार महंगे साबित हो रहे हैं। मुंबई जैसे व्यस्त बाजार में भी यही कहानी दोहराई जा रही है, जहां प्रति टन भाव पिछले स्तर से काफी ऊपर चढ़ गया। अन्य शहरों में गोवा और हैदराबाद जैसे इलाकों में भी समान वृद्धि दर्ज की गई। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने दाम ऊंचे कर दिए हैं। यह बदलाव पूरे देश को प्रभावित कर रहा है, खासकर जहां बड़े पैमाने पर मकान और सड़कें बन रही हैं।
दाम बढ़ने के पीछे कारण
इस उछाल की जड़ में मांग और आपूर्ति का गहरा असंतुलन है। सरकारी योजनाओं से बड़े प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ी है, जिससे सरिया की जरूरत कई गुना हो गई। दूसरी ओर, कच्चे माल जैसे लोहे के अयस्क और कोयले की उपलब्धता सीमित हो गई। ऊर्जा खर्च बढ़ने से उत्पादन लागत भी चढ़ी। वैश्विक बाजार की अस्थिरता ने घरेलू कीमतों को प्रभावित किया। मिलों ने लगातार मूल्य समायोजन किया, जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा। मौसम और लॉजिस्टिक्स चुनौतियां भी इसमें इजाफा कर रही हैं।
आम आदमी पर बोझ
एक सामान्य घर के निर्माण में कई टन सरिया लगता है, और इसकी कीमत बढ़ने से कुल खर्च में बड़ा इजाफा हो जाता है। बिल्डर अब लागत ग्राहकों पर डाल रहे हैं, जिससे फ्लैट और प्लॉट महंगे हो रहे। छोटे ठेकेदार परेशान हैं, क्योंकि प्रोजेक्ट देरी हो रही। मध्यम वर्ग के लिए यह झटका है, जो पहले से महंगाई से जूझ रहा। कुछ लोग स्टॉकिंग का सहारा ले रहे, लेकिन जोखिम भरा है।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले कुछ हफ्तों में स्थिरता आ सकती है, लेकिन पूर्ण सामान्यीकरण में समय लगेगा। उपभोक्ताओं को सलाह है कि वे विश्वसनीय डीलर्स से संपर्क करें और बल्क खरीद पर छूट तलाशें। सरकार की सब्सिडी योजनाओं से कुछ राहत मिल सकती। लंबे समय के अनुबंध और वैकल्पिक सामग्री पर विचार जरूरी।
यह संकट विकास की गति को दर्शाता है, लेकिन नियंत्रण जरूरी। जागरूक रहें, स्मार्ट खरीदारी करें ताकि सपना अधूरा न रहे। (















