देशभर में दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। राष्ट्रीय आरोग्य निधि योजना के तहत अब हर मरीज को अपने इलाज के लिए 50 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद मिल सकेगी। यह व्यवस्था उन घातक रोगों के लिए है जो आम बीमारियों से कहीं ज्यादा जटिल और महंगे साबित होते हैं। हाल के केंद्रीय बजट ने इस पहल को नई ऊंचाई दी है, जिससे दवाइयों की कीमतें और घटी हैं।

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क्या हैं दुर्लभ बीमारियां और क्यों जरूरी है मदद
दुर्लभ रोग वे हैं जो बहुत कम लोगों को होते हैं, लेकिन इनका असर जानलेवा होता है। बच्चों और युवाओं में लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर या कुछ खास इम्यून सिस्टम की खराबी जैसी बीमारियां शामिल हैं। इनका इलाज सालाना लाखों खर्च मांगता है, जो गरीब परिवारों के लिए नामुमकिन साबित होता है। सरकार ने 2021 में राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति लागू की, जिसमें 63 ऐसी बीमारियों को चिह्नित किया गया। पहले एकमुश्त इलाज वाली बीमारियों पर सीमा 20 लाख थी, लेकिन अब सभी के लिए 50 लाख तक मदद का प्रावधान है।
किन अस्पतालों में मिलेगा लाभ
यह सहायता सिर्फ चुनिंदा सरकारी अस्पतालों में ही उपलब्ध होगी। केंद्र ने आठ प्रमुख संस्थानों को उत्कृष्टता केंद्र घोषित किया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर और दुर्लभ रोग समितियां बैठती हैं। इनमें दिल्ली का AIIMS, चंडीगढ़ का PGIMER और कुछ अन्य शामिल हैं। मरीज को पहले यहीं इलाज शुरू कराना होगा। निजी अस्पतालों में खर्च की भरपाई नहीं होगी। पंजाब के निवासियों के लिए चंडीगढ़ का PGIMER सबसे सुविधाजनक विकल्प साबित हो सकता है।
कौन आवेदन कर सकता है, क्या हैं शर्तें
सहायता पाने के लिए मरीज भारत का नागरिक होना चाहिए। बीमारी नीति की सूची में दर्ज होनी चाहिए। गरीबी रेखा से नीचे होने की बाध्यता नहीं है। आयुष्मान भारत योजना से जुड़े लोग भी पात्र हैं। परिवार की सालाना कमाई 6 लाख तक मानी जाती है, लेकिन ऊपरी आयु सीमा नहीं है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी लाभ ले सकते हैं। यह व्यवस्था करीब 40 प्रतिशत आबादी को कवर करती है।
आवेदन कैसे करें?
सबसे पहले उत्कृष्टता केंद्र में डॉक्टर से जांच कराएं। निदान रिपोर्ट लें, जिसमें बीमारी की पुष्टि हो। फिर विशेष फॉर्म भरें, जिसमें आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र और इलाज का अनुमान जोड़ें। यह फॉर्म अस्पताल की समिति को सौंपें। जांच के बाद 15 से 30 दिनों में फंड जारी हो जाता है। ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी आवेदन की सुविधा शुरू हो रही है। देरी से बचने के लिए जल्दी कार्रवाई करें, क्योंकि फंड पूल सीमित होता है।
बजट 2026 की नई राहतें
इस साल के बजट में वित्त मंत्री ने सात दुर्लभ बीमारियों की दवाओं और पोषण आहारों पर आयात शुल्क पूरी तरह हटा दिया। इससे दवाओं की कीमत 10 से 20 प्रतिशत कम हो गई। कैंसर रोगियों को भी इसी तरह फायदा हुआ। यह कदम भारत को उन्नत चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हजारों परिवारों को नया जीवन मिलेगा।
चुनौतियां बाकी, लेकिन उम्मीद बंधी
फिर भी रास्ते में बाधाएं हैं। फंड जल्दी समाप्त हो जाता है, डॉक्टरों की कमी और जागरूकता का अभाव समस्या पैदा करता है। सरकार को और केंद्र खोलने चाहिए। अमृतसर जैसे शहरों में स्थानीय स्तर पर शिविर लगाए जा सकते हैं। एक मां ने कहा, मेरे बच्चे की बीमारी ने हमें तोड़ दिया था, लेकिन यह मदद उम्मीद जगाती है। स्वास्थ्य मंत्रालय की हेल्पलाइन पर संपर्क करें। यह योजना साबित कर रही है कि सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है।















