भारतीय रेलवे ने आम यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या को हल करने के लिए एक बेमिसाल व्यवस्था लागू की है। अब बसों की तर्ज पर ट्रेन में बैठे-बैठे टिकट बन जाएगा। स्टेशन पर लंबी लाइनों और धक्कमुक्की से बचने का यह तरीका यात्रा को आसान और तेज बना देगा।

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नई व्यवस्था का आधार
रेलवे ने सोचा कि छोटे स्टेशनों पर टिकट काउंटर की कमी से यात्री परेशान होते हैं। इसलिए कर्मचारियों को पोर्टेबल टिकट प्रिंटर से लैस किया गया है। ये कर्मचारी प्लेटफॉर्म या ट्रेन के पास घूमते रहते हैं। यात्री अपना नाम, मंजिल और कोच नंबर बताता है, तो तुरंत अनारक्षित टिकट प्रिंट हो जाता है। पूरी प्रक्रिया दो मिनट से कम लगती है। यह सिस्टम सैटेलाइट कनेक्टेड है, जो सीट की उपलब्धता तुरंत बताता है।
शुरूआत कहां से हुई
पहले चरण में उत्तर भारत के आगरा क्षेत्र के 25 स्टेशनों पर यह सुविधा चालू हो चुकी है। प्रमुख स्टेशन जैसे मथुरा, आगरा कैंट और फतेहपुर पर मशीनें लगी हैं। ग्रामीण इलाकों में जहां पहले टिकट के लिए घंटों इंतजार होता था, वहां अब राहत मिली है। रेलवे का प्लान है कि साल के अंत तक सैकड़ों स्टेशनों पर फैला दें। बड़े जंक्शन पर भी इसे बढ़ाया जा रहा है।
यात्रियों के लिए खास फायदे
- समय की जबरदस्त बचत, रश के समय सीधे ट्रेन चढ़ें।
- डिजिटल ट्रैकिंग से टिकट की वैधता साबित करना सरल।
- स्थानीय लोगों को ट्रेनिंग देकर नौकरियां पैदा हुईं।
- महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बिना बोझा उठाए टिकट पाएं।
इसके साथ ही मोबाइल ऐप से बुकिंग पर 3 से 6 फीसदी छूट भी जोड़ी गई है। डिजिटल पेमेंट करने वालों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। यह योजना अगले छह महीने चलेगी।
उपयोग का आसान तरीका
स्टेशन पहुंचें, कर्मचारी ढूंढें या आवाज दें। आधार कार्ड या फोन नंबर दें, मंजिल बताएं। कैश या UPI से भुगतान करें, टिकट हाथ में। टिकट पर क्यूआर कोड होता है, जो टीटी आसानी से चेक कर लेते हैं। ट्रेन लेट होने पर 10 मिनट में रिफंड भी संभव। बारिश या धुंध में भी यह सुचारु चलता रहता है। ऐप डाउनलोड कर घर से ही बुकिंग शुरू करें।
डिजिटल क्रांति का हिस्सा
रेलवे डिजिटल इंडिया को मजबूत कर रहा है। पहले स्टेशन पर अफरा-तफरी आम थी, अब व्यवस्था सुधर गई। वंदे भारत जैसी तेज ट्रेनों में भी जल्द इंटीग्रेशन होगा। मंत्रालय फीडबैक ले रहा है ताकि कमियां दूर हों। करोड़ों यात्रियों का सफर अब आरामदायक बनेगा।
भविष्य की संभावनाएं
यह कदम छोटा लगे लेकिन असर बड़ा है। आने वाले समय में वॉलेट इंटीग्रेशन और वॉयस बुकिंग जोड़ी जा सकती है। रेलवे ने साबित किया कि तकनीक से आम आदमी की जिंदगी बदल सकती है। छोटे स्टेशनों पर चाय की चुस्की के साथ टिकट मिलना नया अनुभव देगा। लाखों परिवारों को फायदा होगा।















