
भारतीय रक्षा क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, भारत की सैन्य ताकत में एक ऐसा अध्याय जुड़ने जा रहा है जो न केवल आसमान में देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाएगा, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा फ्रांस की सरकार और डसॉल्ट एविएशन ने भारत में ही राफेल लड़ाकू विमानों के निर्माण को लेकर हरी झंडी दे दी है।
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90 से ज्यादा विमान ‘मेड इन इंडिया’ होंगे
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना (IAF) की 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की मेगा डील में अब स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता दी गई है, इस ऐतिहासिक सौदे के तहत कुल विमानों में से लगभग 90 से 96 राफेल विमानों का निर्माण भारतीय धरती पर होगा इससे पहले भारत ने 36 राफेल विमान सीधे फ्रांस से खरीदे थे, जो पहले ही वायुसेना के बेड़े का हिस्सा बन चुके हैं।
नागपुर और हैदराबाद बनेंगे विनिर्माण के केंद्र
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के हालिया रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत को केवल विमान नहीं, बल्कि तकनीक भी हस्तांतरित की जाएगी।
- टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL): हैदराबाद में राफेल के फ्यूजलाज (मुख्य ढांचा) बनाने की तैयारी तेज हो गई है।
- फाइनल असेंबली लाइन: नागपुर में विमानों की फाइनल असेंबली लाइन स्थापित होने की उम्मीद है, जिससे भारत राफेल का एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बन जाएगा।
चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में राफेल का उत्पादन शुरू होने से न केवल लागत में कमी आएगी, बल्कि विमानों के रख-रखाव और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता भी आसान होगी 114 नए राफेल विमानों के आने के बाद भारतीय वायुसेना के पास लगभग 150 से अधिक राफेल की ताकत होगी, जो चीन और पाकिस्तान की संयुक्त वायु सेनाओं के खिलाफ भारत को सामरिक बढ़त (Strategic Edge) दिलाएगी।
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रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये की इस महा-डील से रक्षा क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे साथ ही, भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को भी सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा।
फ्रांस का यह फैसला भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को नए युग में ले जा रहा है, अब राफेल केवल एक आयातित हथियार नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनेगा।















