
खेती और पशुपालन में जहाँ आज का युवा भविष्य नहीं देख पा रहा है, वहीं पंजाब के एक प्रगतिशील किसान ने मिसाल पेश की है, कभी ₹6 लाख के कर्ज के बोझ तले दबे लुधियाना के चासवाल गांव निवासी सिकंदर सिंह ने अपनी मेहनत और आधुनिक विजन के दम पर डेयरी सेक्टर में करोड़ों का टर्नओवर हासिल कर लिया है, आज वे न केवल कर्जमुक्त हैं, बल्कि एक सफल ‘डेयरी उद्यमी’ के रूप में देश भर के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
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कर्ज से करोड़पति बनने का सफर
सिकंदर सिंह के मुताबिक, एक समय उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि बैंक का कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया था, पारंपरिक तरीकों को छोड़ उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया और डेयरी फार्मिंग की शुरुआत की उन्होंने पशुओं की नस्ल सुधार और उनके खान-पान पर विशेष ध्यान दिया।
इजरायली तकनीक ने बदली सूरत
उनकी इस सफलता का सबसे बड़ा राज आधुनिक तकनीक है। सिकंदर ने अपने फार्म पर ‘इजरायली मिल्किंग टेक्नोलॉजी’ का इस्तेमाल किया, जिससे दूध निकालने की प्रक्रिया न केवल स्वच्छ हुई बल्कि पशुओं की क्षमता भी बढ़ी।
- उत्पादन: वर्तमान में उनके फार्म में रोजाना 3,000 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।
- मार्केटिंग रणनीति: वे बिचौलियों के बजाय सीधे ग्राहकों तक पहुँचते हैं। रोजाना करीब 1,500 लीटर दूध ₹60 प्रति लीटर के भाव पर सीधे उपभोक्ताओं को बेचा जाता है, जिससे उन्हें सीधा मुनाफा होता है, शेष दूध वे वेरका और अमूल जैसी सहकारी समितियों को उपलब्ध कराते हैं।
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मुख्यमंत्री पुरस्कार से हुए सम्मानित
सिकंदर सिंह के इसी जुनून और कामयाबी को देखते हुए हाल ही में गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (GADVASU) ने उन्हें ‘मुख्यमंत्री पुरस्कार 2025-26’ से नवाजा है।
युवाओं के लिए संदेश
आज सिकंदर सिंह का कुल टर्नओवर ₹4 करोड़ सालाना के पार पहुँच चुका है, उनका कहना है कि अगर डेयरी फार्मिंग को आधुनिक मशीनरी, बेहतर नस्ल के पशुओं और सीधी मार्केटिंग से जोड़ा जाए, तो यह बिजनेस कभी फेल नहीं हो सकता।















