
भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग बेहद सख्त है, अक्सर लोग एक शहर से दूसरे शहर शिफ्ट होने पर नया वोटर आईडी (Voter ID) बनवा लेते हैं, लेकिन पुराने कार्ड को रद्द करना भूल जाते हैं, अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। एक से अधिक वोटर आईडी रखना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह आपको सलाखों के पीछे भी पहुंचा सकता है।
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किस कानून के तहत होगी कार्रवाई?
दो वोटर आईडी कार्ड रखने का मामला लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act), 1950 के दायरे में आता है। इस कानून की दो प्रमुख धाराएं इस प्रकार हैं:
- धारा 17 और 18: ये धाराएं स्पष्ट करती हैं कि कोई भी व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में या एक ही क्षेत्र में दो बार अपना नाम दर्ज नहीं करा सकता।
- धारा 31 (सजा का प्रावधान): यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर मतदाता सूची में गलत जानकारी देता है या दो आईडी कार्ड बनवाता है, तो उसे एक साल तक की जेल, भारी जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
PAN और Aadhaar पर भी हैं कड़े नियम
सिर्फ वोटर आईडी ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी दस्तावेजों के मामले में भी सरकार का रुख बेहद सख्त है:
- PAN कार्ड: इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139A के तहत एक व्यक्ति के पास केवल एक ही पैन कार्ड हो सकता है। यदि किसी के पास दो पैन कार्ड मिलते हैं, तो आयकर विभाग उस पर ₹10,000 का जुर्माना लगा सकता है। यह टैक्स चोरी रोकने के लिए किया गया प्रावधान है।
- आधार कार्ड: आधार कार्ड व्यक्ति की बायोमेट्रिक पहचान से जुड़ा होता है। हालांकि आधार एक्ट के तहत फर्जी जानकारी देना अपराध है, लेकिन अब सरकार ने वोटर आईडी को आधार से लिंक करने का विकल्प भी दिया है ताकि डुप्लीकेट वोटर्स की आसानी से पहचान की जा सके।
क्या है बचाव का रास्ता?
यदि आपके पास गलती से दो वोटर आईडी कार्ड बन गए हैं, तो कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए आपको तुरंत इसे सरेंडर कर देना चाहिए।
- Form-7 का उपयोग: अतिरिक्त या पुराने वोटर आईडी को रद्द करवाने के लिए आपको ‘फॉर्म-7’ भरना होगा।
- ऑनलाइन प्रक्रिया: आप चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाकर ऑनलाइन भी नाम कटवाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- BLO से संपर्क: आप अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को लिखित में जानकारी देकर अपना पुराना कार्ड सरेंडर कर सकते हैं।
‘एक व्यक्ति-एक वोट’ के सिद्धांत का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है, फर्जी या दोहरी आईडी रखना न केवल चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करता है, बल्कि आपके करियर और छवि पर भी दाग लगा सकता है।















