
अपना सपनों का आशियाना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक बड़ी वित्तीय सलाह सामने आई है, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आप घर की रजिस्ट्री अपनी पत्नी के नाम पर करते हैं या उन्हें ‘को-ओनर’ (सह-मालिक) बनाते हैं, तो आप न केवल कानूनी रूप से सुरक्षित होते हैं, बल्कि लाखों रुपये की सीधी बचत भी कर सकते हैं। आइए जानते हैं वे 3 बड़े फायदे जो आपके बैंक बैलेंस को बढ़ा सकते हैं।
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स्टांप ड्यूटी में भारी छूट: सीधे लाखों की बचत
संपत्ति की रजिस्ट्री के समय लगने वाली ‘स्टांप ड्यूटी’ एक बड़ा खर्च होती है। भारत के अधिकांश राज्यों में महिला खरीदारों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार विशेष रियायत देती है, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में महिलाओं के लिए स्टांप ड्यूटी की दरें पुरुषों के मुकाबले 1% से 2% तक कम हैं।
- उदाहरण के तौर पर: अगर आप ₹1 करोड़ की प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो पत्नी के नाम रजिस्ट्री कराकर आप केवल स्टांप ड्यूटी के मद में ₹1 लाख से ₹2 लाख तक बचा सकते हैं।
इनकम टैक्स में ‘डबल’ धमाका
अगर पति और पत्नी दोनों मिलकर संपत्ति खरीदते हैं और दोनों ही वर्किंग हैं, तो यह टैक्स बचाने का सबसे शानदार तरीका है, संयुक्त स्वामित्व (Joint Ownership) के मामले में:
- प्रिंसिपल अमाउंट: दोनों पार्टनर इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख – ₹1.5 लाख (कुल ₹3 लाख) की छूट ले सकते हैं।
- ब्याज पर राहत: धारा 24 के तहत होम लोन के ब्याज पर भी दोनों को ₹2 लाख – ₹2 लाख (कुल ₹4 लाख) तक का डिडक्शन मिलता है। यह निवेश के नजरिए से एक मास्टरस्ट्रोक साबित होता है।
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सस्ता होम लोन और PMAY सब्सिडी का लाभ
वित्तीय संस्थान और बैंक महिला ग्राहकों को ‘प्रायोरिटी’ देते हैं।
- कम ब्याज दर: एसबीआई (SBI) और एचडीएफसी (HDFC) जैसे कई प्रमुख बैंक महिलाओं को होम लोन की ब्याज दरों में 0.05% से 0.10% तक की छूट देते हैं। लंबी अवधि के लोन में यह छोटी सी कटौती भी लाखों का अंतर पैदा करती है।
- सरकारी योजना: प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत ₹2.67 लाख तक की सब्सिडी प्राप्त करने के लिए भी घर के मालिकाना हक में महिला का नाम होना अनिवार्य या प्राथमिकता पर रखा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पत्नी के नाम पर संपत्ति लेना न केवल वित्तीय रूप से फायदेमंद है, बल्कि यह परिवार की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत करता है, किसी भी व्यावसायिक जोखिम की स्थिति में पत्नी के नाम वाली संपत्ति एक ‘सेफ हेवन’ की तरह काम करती है।















