फरवरी का महीना उत्तर भारत के किसानों के लिए कमाई का बड़ा मौका लेकर आया है। अगर आप कम लागत में जल्दी मुनाफा चाहते हैं, तो तर ककड़ी यानी लंबी ककड़ी या टेरा ककड़ी की खेती अभी शुरू कर दें। महज 35-40 दिनों में तैयार होने वाली यह फसल बाजार में 80 से 150 रुपये प्रति किलो तक भाव दिला रही है, जिससे एक एकड़ में 3 से 8 लाख तक का शुद्ध लाभ संभव है। गंगा तट से लेकर यूपी-हरियाणा के मैदानी इलाकों तक यह फसल किसानों की जिंदगी बदल रही है।

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फरवरी बुवाई क्यों है फायदेमंद?
फरवरी के पहले दो सप्ताह में बुवाई करने से अप्रैल तक पहली कटाई हो जाती है। इस समय बाजार में अन्य सब्जियों की आवक कम होती है, जिससे तर ककड़ी की डिमांड चरम पर पहुंच जाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि बालू वाली या दोमट मिट्टी में यह फसल बेस्ट परिणाम देती है। देसी किस्में जैसे आरका शीतल या स्थानीय बीज इस्तेमाल करें, जो सस्ते और विश्वसनीय हैं। हाइब्रिड बीजों से बचें, क्योंकि वे महंगे पड़ते हैं और मौसम पर निर्भर रहते हैं। एक एकड़ में 50-70 क्विंटल तक पैदावार आसानी से हो जाती है, जो गर्मी के मौसम में लाखों का टर्नओवर देती है।
आसान खेती की पूरी तकनीक
खेत तैयार करने के लिए सबसे पहले 5-5 फीट चौड़े बेड बनाएं। इन बेड्स पर 1.5 फीट की दूरी से गड्ढे खोदें और हर गड्ढे में 2-3 बीज डालें। प्रति एकड़ 1 से 1.5 ट्रॉली सड़ी गोबर की खाद और डीएपी उर्वरक अच्छी तरह मिला लें। बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें, लेकिन ज्यादा पानी न दें वरना बीज सड़ सकते हैं। बेड्स पर प्लास्टिक मल्चिंग या घास की परत डालें ताकि नमी बनी रहे और खरपतवार कम हों। 7-10 दिनों में अंकुरण शुरू हो जाएगा। खरपतवार नियंत्रण के लिए हल्का स्प्रे करें, लेकिन ज्यादा कीटनाशक न इस्तेमाल करें। 35वें दिन से तुड़ाई शुरू हो जाती है और सही देखभाल से दो महीने तक फसल चलती रहती है।
खर्चा-कमाई का सरल हिसाब
एक एकड़ की खेती में बीज और खाद पर मात्र 7 से 10 हजार रुपये लगते हैं। मजूरी, सिंचाई और अन्य खर्च मिलाकर कुल 25-30 हजार रुपये का निवेश होता है। 50-70 क्विंटल उत्पादन पर 80-150 रुपये किलो भाव मिले तो कुल आय 4 से 10 लाख तक पहुंच जाती है। इससे शुद्ध मुनाफा 3.5 से 9 लाख रुपये रहता है, जो 500 प्रतिशत से ज्यादा रिटर्न है। मंडी में सीधे बिक्री करें, जहां थोक भाव भी अच्छा मिलता है। छोटे किसान भी आधे एकड़ से शुरू कर लाखों कमा सकते हैं।
सफलता के जरूरी टिप्स
कृषि वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि फरवरी अंत तक बुवाई पूरी कर लें, क्योंकि मार्च में गर्मी बढ़ने से देरी खतरनाक साबित हो सकती है। मिट्टी की जांच करवाएं और पीएच 6-7 रखें। फसल पर नियमित नजर रखें, ताकि रोग या कीट लगें तो तुरंत कार्रवाई हो। कई किसान बांस की छड़ी से सहारा देकर लताओं को ऊंचा उठाते हैं, जिससे पैदावार बढ़ती है। यह फसल कम रिस्क वाली है और नए किसानों के लिए आदर्श। अभी मौका हाथ से न जाने दें, क्योंकि यह आपकी आमदनी दोगुनी करने वाली फसल है। जय जवान, जय किसान!















