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डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर के लिए पुलिस वेरिफिकेशन (PCC) अनिवार्य! बिहार में नए नियम लागू, बिना कुंडली चेक किए नहीं मिलेगी नौकरी।

बिहार में डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवरों के लिए PCC अनिवार्य! पुलिस मुख्यालय के नए नियम से Zomato, Swiggy, Ola जैसी कंपनियों को वर्कर्स की 'कुंडली चेक' करनी होगी। गिग वर्कर्स एक्ट 2025 के तहत सुरक्षा बढ़ेगी, 4 लाख बीमा लाभ। RTPS पोर्टल से आसान आवेदन। ग्राहक सुरक्षित, लेकिन भर्ती में देरी संभव।

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डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर के लिए पुलिस वेरिफिकेशन (PCC) अनिवार्य! बिहार में नए नियम लागू, बिना कुंडली चेक किए नहीं मिलेगी नौकरी।

बिहार में ऑनलाइन डिलीवरी और कैब सेवाओं के तेजी से विस्तार के बीच राज्य पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर और अन्य गिग वर्कर्स के लिए पुलिस वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट (PCC) अनिवार्य कर दिया गया है। बिना ‘कुंडली चेक’ के नौकरी नहीं मिलेगी। यह नियम सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू किया गया है, क्योंकि हालिया आपराधिक घटनाओं ने ग्राहकों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी और कंपनियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

राज्य सरकार ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे Zomato, Swiggy, Ola, Uber, Blinkit को अपने सभी डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवरों का पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र (Character Certificate) जमा करने का आदेश दिया है। मौजूदा 2.5 लाख गिग वर्कर्स को तय समयसीमा के भीतर PCC अपलोड करना होगा, वरना उनकी सेवाएं निलंबित हो सकती हैं। पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में यह सबसे पहले लागू होगा, जहां ई-कॉमर्स का जाल सबसे घना है। पुलिस महानिरीक्षक विवेक कुमार ने कहा, “सुरक्षा पहले। कंपनियां वर्कर्स की लिस्ट देंगी और सत्यापन सुनिश्चित करेंगी। दूसरे राज्य से आने वालों का भी तत्काल वेरिफिकेशन होगा।”

गिग वर्कर्स एक्ट 2025

यह फैसला बिहार प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (सुरक्षा, कल्याण और नियमन) अधिनियम, 2025 के तहत लिया गया है, जो विधानसभा में पारित हो चुका है। अधिनियम गिग इकोनॉमी को विनियमित करता है और वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है। 90 दिन काम पूरा करने वाले पंजीकृत वर्कर्स को दुर्घटना बीमा (4 लाख तक), स्वास्थ्य सुविधाएं और पेंशन जैसे लाभ मिलेंगे। e-Shram पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। स्कूल बस-वैन ड्राइवरों के लिए अतिरिक्त सख्ती है: PCC के साथ दो नजदीकी रिश्तेदारों का विवरण भी देना पड़ेगा।

पृष्ठभूमि में कई हादसे हैं। पटना में डिलीवरी बॉय से जुड़ी चोरी, भागलपुर में कैब ड्राइवरों के संदिग्ध मामले सामने आए। ज्यादातर प्लेटफॉर्म्स पहले बैकग्राउंड चेक नहीं करते, जिससे अपराधी घुसपैठ कर पाते। अब कंपनियों पर जिम्मेदारी: वर्कर लिस्ट पुलिस को सौंपनी होगी। कोताही पर FIR और लाइसेंस रद्द का प्रावधान। गया, दरभंगा, पूर्णिया जैसे उभरते हब में विशेष टीमें गठित की गईं।

आवेदन प्रक्रिया

PCC के लिए बिहार सरकार का RTPS (Right to Public Services) पोर्टल सबसे सुविधाजनक।उम्मीदवार http://serviceonline.bihar.gov.in पर लॉगिन करें। आधार कार्ड, फोटो, निवास प्रमाण के साथ ‘चरित्र प्रमाण पत्र’ चुनें। फीस 50 रुपये, प्रोसेसिंग 15 दिन। SMS अलर्ट मिलेगा। ऑफलाइन पुलिस स्टेशन से भी संभव, लेकिन डिजिटल तरीका तेज। ग्रामीण क्षेत्रों में CSC सेंटर मदद करेंगे।

प्रभाव: फायदे-नुकसान

गिग वर्कर्स के लिए दोहरी मार। एक तरफ सुरक्षा बढ़ेगी, ग्राहक विश्वास लौटेगा। दूसरी तरफ, नई भर्ती रुक सकती है। छोटे प्लेटफॉर्म्स पर दबाव। Zomato-सरीखी कंपनियां पहले से वेरिफिकेशन करती हैं, लेकिन लोकल एग्रीगेटर्स को चुनौती। श्रमिक संगठन स्वागत कर रहे: “कानूनी मान्यता मिली।” लेकिन युवा वर्कर्स चिंतित: “कागजी घमासान बढ़ेगा।”

सरकार का दावा: 6 महीने में सभी वर्कर्स कवर। केंद्र के गिग वर्कर्स बिल से प्रेरित। बिहार गिग इकोनॉमी का हब बनेगा, अपराध मुक्त। क्या यह कदम सफल होगा? समय बताएगा।

Author
info@divcomkonkan.in

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