देशभर के कारीगरों और शिल्पकारों के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना एक वरदान साबित हो रही है। लाखों लोगों ने पंजीकरण कराया, लेकिन सवाल वही है, ट्रेनिंग का स्टाइपेंड, टूलकिट का पैसा या लोन कब खाते में आएगा. अच्छी खबर यह है कि अब कोई ब्रांच दौड़ने की जरूरत नहीं. सरकारी पोर्टल पर कुछ ही क्लिक से पूरी जानकारी मिल जाती है। यह सुविधा डिजिटल इंडिया की ताकत दिखाती है, जिससे ग्रामीण इलाकों तक लाभ पहुंच रहा है।

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योजना का पैसा कब और कैसे मिलता है?
योजना के पहले चरण में 15,000 रुपये का रजिस्ट्रेशन इंसेंटिव, फिर ट्रेनिंग के दौरान हर महीने 500 रुपये स्टाइपेंड और टूलकिट की कीमत 15,000 से 25,000 तक। इसके बाद दूसरी किस्त ट्रेनिंग खत्म होने पर और लोन की पहली किस्त स्वीकृति के बाद। पैसे डायरेक्ट बेनिफिशियरी ट्रांसफर से बैंक खाते में जाते हैं। देरी की शिकायतें आम हैं, खासकर पंजाब, बिहार और यूपी जैसे राज्यों में। लेकिन स्टेटस चेक से पारदर्शिता बढ़ी है। ज्यादातर मामलों में 30-45 दिनों में पैसा आ जाता है, बशर्ते सभी दस्तावेज पूरे हों।
वेबसाइट से स्टेटस चेक की आसान विधि
सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर पहुंचें। अपना मोबाइल नंबर या आधार डालें। OTP आने पर वेरीफाई करें। फिर पंजीकरण आईडी या लाभार्थी नंबर चुनें। स्क्रीन पर साफ दिखेगा पेमेंट पेंडिंग, प्रोसेसिंग, डिस्बर्स्ड या रिजेक्टेड। अगर पैसा आ चुका तो ट्रांजेक्शन डेट और अमाउंट भी नजर आएगा। यह प्रक्रिया मोबाइल पर भी उतनी ही आसान है। सुबह 9 से रात 10 बजे तक सर्वर तेज चलता है।
मोबाइल ऐप का कमाल इस्तेमाल
प्ले स्टोर से योजना का आधिकारिक ऐप डाउनलोड करें। लॉगिन के बाद डैशबोर्ड में स्टेटस सेक्शन सीधा दिखता है। आधार या रजिस्ट्रेशन नंबर डालें, बस। ऐप नोटिफिकेशन से अपडेट भी मिलते रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कम हो तो ऑफलाइन मोड में भी बेसिक चेक हो जाता है। पंजाब के कई कारीगरों ने बताया कि ऐप से समस्या 80 प्रतिशत सुलझ गई।
अगर पैसा नहीं आया तो क्या करें?
सबसे पहले बैंक स्टेटमेंट चेक करें, शायद ट्रांजेक्शन पास हो गया। स्टेटस रिजेक्टेड हो तो दस्तावेज अपलोड करें या सुधारें। हेल्पलाइन 14437 पर कॉल करें या नजदीकी CSC सेंटर जाएं। वहां वॉलंटियर फ्री में मदद करते हैं। कई बार बैंक डिटेल्स गलत होने से देरी होती है। समय रहते अपडेट रखें तो परेशानी कम। योजना के तहत अब तक करोड़ों रुपये वितरित हो चुके हैं, और 2026 में और तेजी की उम्मीद है।
कारीगरों की सफल कहानियां
अमृतसर के एक बढ़ई ने बताया, स्टेटस चेक करने से पता चला कि 20,000 का टूलकिट पैसा आ गया। इससे नया उपकरण खरीदा और कमाई दोगुनी हो गई। बिहार के लोहार भाइयों ने लोन लेकर वर्कशॉप बढ़ाया। ऐसी कहानियां योजना की सफलता बयां करती हैं। सरकार का फोकस पारंपरिक कला को आधुनिक बनाने पर है।
यह सुविधा न केवल समय बचाती है बल्कि विश्वास भी जगाती है। अगर आप लाभार्थी हैं तो आज ही चेक करें। सपनों को बल मिलेगा।















