ग्रामीण भारत में पशुपालन को बढ़ावा देने वाली केंद्र सरकार की नई योजना ने किसानों और युवाओं में उत्साह भर दिया है। इस योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का आसान ऋण मिलेगा, जिससे गाय भैंस या बकरी पालन जैसे व्यवसाय आसानी से शुरू किए जा सकें। कम ब्याज दर और सब्सिडी की सुविधा ने लाखों परिवारों के सपनों को पर लगाने का मौका दिया है। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है।

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योजना की मुख्य विशेषताएं
यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए खासतौर पर तैयार की गई है। इसमें एक लाख से लेकर दस लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध है। ब्याज दर चार से सात प्रतिशत के बीच रहती है, जबकि सब्सिडी 25 से 35 प्रतिशत तक मिल सकती है। एससी एसटी समुदायों और महिलाओं को इससे भी ज्यादा छूट का लाभ होता है। पशु किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए बिना जमीन गिरवी रखे छोटे ऋण मिल जाते हैं। इससे डेयरी फार्मिंग या अन्य पशुपालन इकाइयां जल्द स्थापित हो पाती हैं। उदाहरण के तौर पर पांच गायों की यूनिट के लिए तीन लाख का ऋण लेने पर लगभग सवा लाख रुपये की सब्सिडी सीधे मदद बन जाती है।
कौन ले सकता है लाभ?
योजना का फायदा उठाने के लिए कुछ बुनियादी शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। उम्मीदवार भारतीय नागरिक हो, उम्र अठारह से साठ वर्ष के बीच हो। छोटे किसान, भूमिहीन पशुपालक, स्वयं सहायता समूह के सदस्य या ग्रामीण युवा प्राथमिकता पाते हैं। प्रधानमंत्री किसान योजना के लाभार्थी या गरीबी रेखा से नीचे वाले परिवारों को जल्द मंजूरी मिलती है। अच्छा क्रेडिट इतिहास होने पर प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसके अलावा पशुपालन के लिए जगह और थोड़ा अनुभव होना जरूरी होता है। अधिकारी आवेदन सत्यापित करने के बाद स्थल निरीक्षण करते हैं, जिससे स्वीकृति निश्चित हो जाती है।
जरूरी कागजात सरलता से जुटाएं
आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए दस्तावेजों की सूची छोटी रखी गई है। पहचान के लिए आधार कार्ड या वोटर पहचान पत्र दें। रहने का प्रमाण राशन कार्ड या बिजली बिल से हो जाता है। बैंक से जुड़े कागज जैसे पासबुक और शाखा कोड अनिवार्य हैं। पशु खरीद के कोटेशन और आय संबंधी प्रमाण पत्र भी जमा करने पड़ते हैं। यदि स्वयं सहायता समूह से जुड़े हैं तो उसका प्रमाण दें। प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर जमा करने से डेयरी यूनिट के लिए तुरंत सहायता मिल जाती है। ये कागजात जुटाने में ज्यादा समय नहीं लगता।
आवेदन की आसान प्रक्रिया
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन संभव है। सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर फॉर्म भरें। बैंक के मोबाइल ऐप से दस्तावेज अपलोड करें। नजदीकी शाखा में जाकर फॉर्म जमा करने का विकल्प भी है। आवेदन के बाद स्थिति की जांच पोर्टल से होती रहती है। स्वीकृति के पंद्रह से तीस दिनों में राशि खाते में आ जाती है। चुकौती की अवधि तीन से सात वर्ष की होती है, जिसमें शुरुआती मोहलत भी मिलती है। पंजाब हरियाणा जैसे राज्यों में स्थानीय पोर्टल भी सक्रिय हैं।
जीवन बदलने वाले फायदे
इस योजना से मासिक आय बीस से पचास हजार रुपये तक हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग इसे लाभकारी बनाती है। समय पर किस्त चुकाने से भविष्य के ऋण आसान हो जाते हैं। किसान केवल पशुपालन पर ही पैसा खर्च करें। फर्जी एजेंटों से बचें और बैंक से सीधी जानकारी लें। लुधियाना के एक किसान ने चार भैंसें खरीदकर परिवार की आय दोगुनी कर ली। यह योजना ग्रामीण विकास की नई उम्मीद है। अधिक जानकार के लिए नजदीकी बैंक या NABARD कार्यालय से संपर्क करें।















