विदेश में बसे करोड़ों भारतीय मूल के नागरिकों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला होने वाला है। चुनाव आयोग ने NRIs को बिना भारत लौटे ही वोट डालने की सुविधा देने के लिए क्रांतिकारी प्लान तैयार किया है। ई-बैलट और प्रॉक्सी वोटिंग सिस्टम लागू होने से NRIs की आवाज भारतीय लोकतंत्र में पूरी ताकत से गूंज सकेगी। संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित यह प्रस्ताव जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन के जरिए साकार होगा, जो NRIs के लिए वोटिंग को सरल और सुलभ बना देगा।

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वर्तमान व्यवस्था की कमियां
फिलहाल NRIs को वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के बाद भी पोलिंग बूथ पर शारीरिक रूप से पहुंचना पड़ता है। यह प्रक्रिया न सिर्फ महंगी है, बल्कि समय लेने वाली भी। 2024 के लोकसभा चुनावों में करीब एक लाख NRIs रजिस्टर्ड थे, लेकिन महज 3,000 के आसपास ही वोट डाल सके। खासकर केरल, पंजाब, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से बसे NRIs सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। अमेरिका, यूएई, ब्रिटेन और कनाडा में रहने वाले लाखों भारतीय इस कमी के शिकार हो रहे हैं। नतीजतन, उनकी चिंताएं जैसे प्रवासी नीतियां, रोजगार और आर्थिक मुद्दे चुनावों में कम प्रतिबिंबित होते हैं।
चुनाव आयोग का नया प्लान क्या है?
चुनाव आयोग अब ई-ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट सिस्टम को बढ़ावा दे रहा है। इसके तहत NRIs विदेश से ही डिजिटल बैलट डाउनलोड कर वोट भर सकेंगे। प्रॉक्सी वोटिंग का विकल्प भी खुलेगा, जिसमें NRIs किसी भरोसेमंद व्यक्ति को अपनी ओर से वोट डालने की अनुमति दे सकेंगे। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बेहद आसान होगी, NVSP पोर्टल पर फॉर्म 6A भरें, पासपोर्ट और विदेशी एड्रेस प्रूफ अपलोड करें। पासपोर्ट ही वोटर आईडी का काम करेगा। यह सुविधा आगामी विधानसभा चुनावों से लागू हो सकती है, जिससे NRIs की भागीदारी में भारी इजाफा होगा।
कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया
मार्च 2025 में संसदीय समिति ने सिफारिश की थी कि NRIs को भारत आए बिना वोट का अधिकार मिलना चाहिए। कानून मंत्रालय ने इसे कैबिनेट नोट के रूप में आगे बढ़ाया है। C-DAC जैसी संस्थाएं ई-पोस्टल बैलट का प्रोटोटाइप तैयार कर चुकी हैं, जहां बैलट ईमेल से भेजा जाएगा और डाक से लौटेगा। सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों ने इस दिशा में गति दी है। हालांकि, पूर्ण ऑनलाइन वोटिंग पर बहस जारी है, लेकिन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सत्यापन तंत्र बनेगा।
भविष्य में संभावित प्रभाव
यह बदलाव लागू होने से NRIs की रजिस्टर्ड संख्या 1.15 लाख से कूदकर कई गुना बढ़ जाएगी। राजनीतिक दल इसे स्वागत योग्य बता रहे हैं, क्योंकि इससे वैश्विक भारतीयों की प्राथमिकताएं चुनावी एजेंडे में जगह बनेंगी। भारत सरकार का यह कदम न केवल लोकतंत्र को मजबूत करेगा, बल्कि देश की वैश्विक छवि को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। NRIs अब दूर बैठे भी मातृभूमि के भविष्य निर्माण में योगदान दे सकेंगे।















