Join Youtube

ChatGPT चलाने वालों को झटका! अब दिखने लगेंगे विज्ञापन, OpenAI के इस फैसले से यूजर्स हैरान

ओपनएआई ने चैटजीपीटी के फ्री वर्जन में विज्ञापन टेस्टिंग शुरू की है। जवाबों के नीचे स्पॉन्सर्ड लिंक्स दिखेंगे, प्रीमियम यूजर्स को राहत। खर्च निकालने और मुफ्त पहुंच बढ़ाने का मकसद। प्राइवेसी सुरक्षित, संवेदनशील टॉपिक्स पर कोई ऐड नहीं। यूजर्स चिंतित, लेकिन फीडबैक से कंट्रोल।

Published On:
ChatGPT चलाने वालों को झटका! अब दिखने लगेंगे विज्ञापन, OpenAI के इस फैसले से यूजर्स हैरान

दुनियाभर में अपनी क्रांतिकारी एआई टेक्नोलॉजी के लिए मशहूर ओपनएआई ने चैटजीपीटी के फ्री वर्जन में विज्ञापन दिखाने का ऐतिहासिक फैसला ले लिया है। अब तक विज्ञापन-मुक्त अनुभव के लिए जाना जाने वाला यह चैटबॉट अब कमाई के नए रास्ते पर कदम रख रहा है। कंपनी ने घोषणा की है कि अमेरिका में फ्री और ‘गो’ टियर यूजर्स पर विज्ञापनों का ट्रायल शुरू हो चुका है, जो जल्द वैश्विक स्तर पर फैल सकता है।

यह बदलाव यूजर्स के बीच बहस छेड़ चुका है। एक तरफ कंपनी का तर्क है कि भारी सर्वर खर्च और लगातार अपडेट के लिए कमाई जरूरी है, वहीं फ्री यूजर्स प्राइवेसी और जवाबों की निष्पक्षता को लेकर सतर्क हैं। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने कहा, “लोग एआई चाहते हैं लेकिन पैसे चुकाना नहीं चाहते। विज्ञापन से हम मुफ्त पहुंच बढ़ाएंगे।”

आर्थिक मजबूती का राज

चैटजीपीटी को चलाने में प्रतिदिन करोड़ों डॉलर खर्च होते हैं- जीपीयू, डेटा सेंटर्स और रिसर्च पर। विज्ञापन इस खाई को भरेंगे, जैसा गूगल और मेटा लंबे समय से कर रहे हैं। दूसरा कारण: मुफ्त सेवा को सुलभ रखना। करोड़ों यूजर्स जो सब्सक्रिप्शन नहीं ले सकते, वे अब भी एआई का फायदा उठा सकेंगे। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रायल से कंपनी को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, बिना मुख्य मिशन प्रभावित किए।

हालांकि, आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह एआई की स्वतंत्रता को कमर्शियल हितों के हवाले कर देगा? ओपनएआई दावा करता है कि जवाब प्रभावित नहीं होंगे।

विज्ञापन का स्वरूप

विज्ञापन चैट जवाबों के ठीक नीचे ‘स्पॉन्सर्ड लिंक्स’ या ‘Ad’ लेबल के साथ दिखेंगे। उदाहरण के लिए, फोन खरीदने की क्वेरी पर संबंधित प्रोडक्ट का ऐड आएगा, लेकिन बीच में नहीं- बस अंत में। यह डिजाइन भ्रम से बचाएगा। कंपनी की वेबसाइट पर स्पष्ट है: उत्तर की क्वालिटी और निष्पक्षता बरकरार रहेगी। ट्रायल अमेरिकी फ्री और गो यूजर्स तक सीमित है। प्रीमियम प्लान्स (प्लस, प्रो, बिजनेस) पर कोई असर नहीं। भारत जैसे बाजारों में रोलआउट का इंतजार है।

फ्री यूजर्स के विकल्प

फ्री यूजर्स विज्ञापन बंद कर सकते हैं, लेकिन कीमत चुकानी पड़ेगी- दैनिक क्वेरी लिमिट घट जाएगी। गो प्लान वालों को यह सुविधा नहीं। सभी यूजर्स फीडबैक देकर पसंद बदल सकते हैं। नया सब्सक्रिप्शन टियर भी आ सकता है, जो ऐड-फ्री हो।

प्राइवेसी चिंताएं

सबसे बड़ा सवाल: डेटा का दुरुपयोग? ओपनएआई assures कि यूजर्स कंट्रोल रखेंगे- पर्सनलाइजेशन बंद, डेटा डिलीट ऑप्शन। विज्ञापनदाताओं को सिर्फ व्यू/क्लिक डेटा मिलेगा, निजी चैट नहीं। संवेदनशील टॉपिक्स (मानसिक स्वास्थ्य, राजनीति) पर कोई ऐड नहीं। फिर भी, विशेषज्ञ सतर्क हैं- क्वेरी-बेस्ड ऐड्स से ट्रैकिंग बढ़ सकती है।

भविष्य की संभावनाएं

ट्रायल फरवरी 2026 तक चल रहा है। सफल रहा तो ग्लोबल रोलआउट। यूजर्स सोशल मीडिया पर विभाजित- कुछ सहमत, अन्य पेड प्लान पर शिफ्ट कर रहे। ओपनएआई का यह कदम एआई इंडस्ट्री को नया ट्रेंड दे सकता है। क्या यह फ्री एआई का अंत है या नया अध्याय? समय बताएगा।

Author
info@divcomkonkan.in

Leave a Comment

🔥 वायरल विडिओ देखें