भारत सरकार ने मोबाइल सिम कार्ड के दुरुपयोग को रोकने के लिए नया नियम पूरी तरह लागू कर दिया है। इस नियम के तहत फर्जी सिम बनाने या बेचने वालों को 50 लाख रुपये तक का जुर्माना और तीन साल तक की जेल हो सकती है। दूरसंचार विभाग ने आम लोगों से सतर्क रहने को कहा है ताकि साइबर फ्रॉड रुके।

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क्या बदला इस नए नियम में?
पहले सिम कार्ड लेना बहुत आसान था, लेकिन अब प्रक्रिया सख्त हो गई है। नया सिम लेने के लिए आधार कार्ड से बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी है। दुकानदार को ग्राहक की फोटो 10 अलग-अलग कोणों से लेनी पड़ती है। साथ ही, उसके नाम पर पहले से कितने सिम हैं, इसकी पूरी जांच होती है। रिटेलर्स को सरकारी पोर्टल पर रजिस्टर होना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना रजिस्ट्रेशन के सिम बेचना अपराध माना जाएगा। यह बदलाव पिछले साल अप्रैल से शुरू हुआ था और इस साल पूरी तरह सक्रिय हो गया।
जुर्माने की सजा इतनी सख्त क्यों?
सरकार का मकसद फर्जी सिम से होने वाले अपराधों पर लगाम लगाना है। अगर कोई अपने नाम का सिम किसी और को बेचता या देता है, तो पहली बार 50 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। दोबारा पकड़े जाने पर यह राशि 2 लाख तक पहुंच सकती है। बड़े स्तर पर फर्जी दस्तावेज दिखाकर सिम बनवाने वालों को 50 लाख का罚 और जेल की सजा मिलेगी। पंजाब समेत कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां फर्जी सिम से बैंक फ्रॉड और धोखाधड़ी की जा रही थी।
आम यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?
साल 2026 में एक बड़ा बदलाव आया है। अब फिजिकल सिम कार्ड के बिना व्हाट्सएप जैसी ऐप्स काम नहीं करेंगी। सिम निकालते ही ऐप बंद हो जाएगी। निष्क्रिय सिम भी अपने आप ब्लॉक हो जाएंगे। इससे यूपीआई फ्रॉड, ओटीपी चोरी और फिशिंग जैसे खतरे कम होंगे। ग्रामीण इलाकों में लोगों को थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन जागरूकता अभियान चल रहे हैं। लोकल दुकानदार बता रहे हैं कि केवाईसी प्रक्रिया अब 30 मिनट तक ले लेती है, पहले 10 मिनट में काम हो जाता था।
साइबर सिक्योरिटी को मिलेगी मजबूती
ये नियम डिजिटल इंडिया को और सुरक्षित बनाएंगे। फर्जी सिम से होने वाले करोड़ों के नुकसान पर रोक लगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में इससे देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। हालांकि, लोगों को सलाह दी जा रही है कि हमेशा वैध दस्तावेज साथ रखें और संदिग्ध दुकानों से सिम न लें।
क्या करें आम नागरिक?
अपने नाम पर मौजूद सभी सिम की जानकारी चेक करें। सरकारी ऐप या हेल्पलाइन 1909 पर संपर्क करें। अगर कोई फ्रॉड का शिकार हो जाए, तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। दुकानदारों को भी रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए ताकि बिजनेस पर असर न पड़े।
भविष्य में और बदलाव संभावित
सरकार डिजिटल ई-केवाईसी को और तेज करने की योजना बना रही है। जल्द ही पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। कुल मिलाकर, ये नियम पारदर्शिता लाएंगे, लेकिन अनुपालन न करने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। मोबाइल यूजर्स अब सावधान हो जाएं।















