भारत की सड़कों और घरों में ये नजारा कहीं भी दिख जाए एक धागे से बंधा नींबू और सात मिर्चियां, दरवाजे पर लहराता हुआ या ट्रक के बंपर पर टंगा। ज्यादातर लोग इसे बुरी नजर से बचाने का घरेलू उपाय मानते हैं। लेकिन क्या ये महज अंधविश्वास है? या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक आधार भी छिपा है? आज हम इस सदियों पुरानी प्रथा को सरल शब्दों में समझेंगे।

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पुरानी रस्म का आधुनिक मतलब
ये परंपरा खासकर व्यापारियों, ड्राइवरों और किसानों में प्रचलित है। मान्यता है कि ये नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेती है। लेकिन गहराई से देखें तो इसके व्यावहारिक फायदे साफ नजर आते हैं। पुराने जमाने में जब कोई कीटनाशक या स्प्रे नहीं थे, तब ये देसी तरीके जीवन को आसान बनाते थे। आइए जानें इसके प्रमुख कारण।
कीड़ों-मच्छरों को भगाने का देसी हथियार
नींबू की तेज खट्टी गंध और मिर्च का जलन पैदा करने वाला कैप्साइसिन मिलकर हवा में एक मजबूत सुगंध फैलाते हैं। धीरे-धीरे इनका रस टपकता रहता है, जो मच्छरों, मक्खियों और अन्य कीटों को दूर रखता है। गर्मियों में ये खासतौर पर कारगर साबित होता था, जब बाजारों या गाड़ियों में कीड़े परेशान करते थे। ये पूरी तरह प्राकृतिक तरीका था, बिना किसी रसायन के।
हवा शुद्ध करने वाला नैचुरल क्लीनर
नींबू और मिर्च की मिली-जुली खुशबू आसपास की बदबू को कवर कर देती है। ये बैक्टीरिया को कम करने में भी मदद करती हैं, खासकर आर्द्र मौसम में। दुकानों या वाहनों में ये एक सस्ता एयर फ्रेशनर की तरह काम करता था। आजकल हम स्प्रे इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ये पुराना जुगाड़ आज भी प्रभावी है।
मन को मिलने वाला आत्मविश्वास
विज्ञान कहता है कि विश्वास दिमाग को शक्तिशाली बना देता है। नींबू-मिर्च देखकर व्यक्ति को लगता है कि वो सुरक्षित है। ये प्लेसिबो प्रभाव की तरह काम करता है – तनाव घटता है, एकाग्रता बढ़ती है। व्यापारी को लगता है उसकी दुकान चमकेगी, ड्राइवर को सफर सुरक्षित लगता है। ये मानसिक मजबूती भी कम नहीं।
नमी और फफूंद से लड़ने का साथी
भारत की गर्म-उमस भरी जलवायु में नमी से फफूंद लगना आम है। नींबू नमी सोख लेता है, जबकि मिर्च इसके विकास को रोकती है। इससे सामान खराब होने का खतरा कम होता है। लटकाने से ये हवा में फैलकर आसपास की जगह को तरोताजा रखते हैं।
बदलने का समय बताने वाला सिग्नल
जब नींबू सूख जाता है या मिर्च मुरझा जाती है, तो इसे फेंककर नया लटकाते हैं। ये नजर सोख लेने का प्रतीक तो है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसका मतलब है कि अब इनका असर खत्म हो गया। ये एक प्राकृतिक टाइमर की तरह काम करता है – समय पर रखरखाव का इशारा।















