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महिलाओं की बल्ले-बल्ले! ₹10,000 के बाद अब सीधे मिलेंगे ₹2 लाख, जानें क्या है सरकार की नई योजना

बिहार सरकार की 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' महिलाओं को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक कदम है। पहले ₹10,000 की शुरुआती किस्त पाने वाली 1.81 करोड़ महिलाओं को अब सफलता पर ₹2 लाख तक अतिरिक्त सहायता 5 चरणों में - SHG योगदान, बिजनेस प्लान व आकलन के साथ। स्वरोजगार से बेरोजगारी घटेगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। जीविका पोर्टल पर चेक करें!

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बिहार सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ (MMRY) के तहत राज्य के हर परिवार की एक महिला को स्वरोजगार शुरू करने के लिए कुल ₹2,10,000 तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। पहले चरण में 1.56 करोड़ महिलाओं को ₹10,000 की शुरुआती किस्त मिल चुकी है, जबकि हाल ही में 25 लाख और लाभार्थियों के खाते में यह राशि ट्रांसफर हो गई।

अब सफल व्यवसाय चलाने वाली महिलाओं को 6 महीने के आकलन के बाद ₹2 लाख तक की अतिरिक्त मदद मिलेगी। यह योजना न केवल महिलाओं का सशक्तिकरण करेगी, बल्कि बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी।

योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

29 अगस्त 2025 को कैबिनेट द्वारा मंजूर यह योजना बिहार rural livelihood promotion society (BRLPS) के माध्यम से चलाई जा रही है। इसका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण और शहरी महिलाओं, खासकर जीविका दीदियों को उद्यमी बनाना है। सितंबर 2025 से शुरू हुई पहली किस्त DBT के जरिए आधार-लिंक्ड खातों में पहुंची। फरवरी 2026 में सीएम नीतीश ने 2500 करोड़ रुपये जारी कर 25 लाख महिलाओं को राहत दी। योजना के तहत छोटे बिजनेस जैसे मुर्गी पालन, सिलाई, अचार बनाना या किराना दुकान को बढ़ावा मिलेगा। आधिकारिक पोर्टल mmry.brlps.in पर रजिस्ट्रेशन और स्टेटस चेक की सुविधा उपलब्ध है।​

पांच चरणों में वितरण

राशि एकमुश्त नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से दी जाती है, ताकि बिजनेस टिकाऊ बने। पहला चरण: ₹10,000 की शुरुआती मदद, जिससे छोटा काम शुरू हो सके। दूसरा चरण: ₹20,000 सरकारी सहायता + महिला का ₹5,000 योगदान। तीसरा चरण: ₹40,000 + ₹10,000 खुद का। चौथा चरण: ₹80,000 + ₹20,000 अंशदान। पांचवां चरण: ₹60,000 ब्रांडिंग, मार्केटिंग और पैकेजिंग के लिए। कुल मिलाकर ₹2 लाख अतिरिक्त, लेकिन जरूरत के हिसाब से – जैसे मुर्गी पालन के लिए ₹50,000 ही अगर पर्याप्त हो। हर चरण में SHG बैठकें, स्किल ट्रेनिंग और आय-व्यय रिकॉर्ड अनिवार्य है।

पात्रता की सात मुख्य शर्तें

₹2 लाख पाने के लिए सख्त शर्तें हैं। पहला, स्वयं सहायता समूह (SHG) में नियमित ₹10 साप्ताहिक योगदान और बैठकें। दूसरा, स्पष्ट बिजनेस प्लान। तीसरा, स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग। चौथा, मासिक FD/RD निवेश। पांचवां, पहले ₹10,000 का सही उपयोग। छठा, जीविका दीदियों को प्राथमिकता। सातवां, 6 महीने बाद विभागीय आकलन में सफलता। ग्रामीण-शहरी सभी महिलाएं पात्र, लेकिन फॉर्म जीविका केंद्र या पोर्टल से भरना होगा। गलतियां जैसे पैसा गैर-रोजगार में खर्च करने पर अगली किस्त रुक सकती है।​

आवेदन प्रक्रिया और स्टेटस चेक

लाभार्थी mmry.brlps.in या mmryrural.brlps.in पर जिला-ब्लॉक चुनकर नाम चेक करें। DBT स्टेटस के लिए आधार नंबर डालें। फरवरी 2026 में जारी नई लिस्ट में 19 लाख महिलाएं शामिल। अगर पैसा न आए तो बैंक विवरण अपडेट कराएं या नजदीकी जीविका केंद्र जाएं। योजना से 18 प्रकार के रोजगार संभव, जो स्थानीय जरूरतों पर आधारित।

प्रभाव और भविष्य

यह योजना बिहार की 1 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के लिए गेम-चेंजर है। पहले चरण से ही हजारों ने बिजनेस शुरू किए। सरकार का लक्ष्य: हर घर एक उद्यमी महिला। हालांकि, सफलता शर्तों के पालन पर निर्भर। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बेरोजगारी घटेगी और GDP बढ़ेगा। महिलाएं तुरंत पोर्टल चेक करें- आपका टर्न हो सकता है! 

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info@divcomkonkan.in

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