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इंडियन आर्मी के वो 5 सबसे घातक रेजिमेंट, जिनका नाम सुनकर कांप उठते हैं दुश्मन! जानें इनकी ताकत और गौरवशाली इतिहास

भारतीय सेना की 5 सबसे घातक रेजिमेंट्स- गोरखा, पैराशूट, बिहार, कुमाऊं व राजपूत- दुश्मनों के दिल में खौफ पैदा करती हैं। 'जय मां काली आयो गोरखाली' से लेकर कारगिल की चोटियों तक इनकी वीर गाथाएं गूंजती हैं। पाक-चीन थर्राते हैं इनके नाम से। गणतंत्र दिवस 2026 पर इनकी परेड ने राष्ट्रभक्ति जगाई।

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most dangerous regiment in indian army

भारतीय सेना सिर्फ हथियारों की ताकत नहीं, बल्कि परंपरा, वीरता और बलिदान का जीवंत प्रतीक है। आर्मी के जवान देश की सेवा व सुरक्षा के लिए हमेशा तैनात रहते हैं, सीमाओं पर दुश्मनों को ललकारते हुए। इंडियन आर्मी के रेजिमेंट सिस्टम को सेना की रीढ़ माना जाता है, जो अनुशासन, निडरता और युद्ध कौशल का अनूठा संगम हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की 5 सबसे खतरनाक रेजिमेंट कौन सी हैं? इनका नाम सुनते ही पाकिस्तान और चीन जैसे दुश्मन थर-थर कांप उठते हैं। इन रेजिमेंट्स के जवान इतने घातक होते हैं कि मिनटों में दुश्मन को धूल चटा सकते हैं।

गोरखा रेजिमेंट

गोरखा रेजिमेंट को भारतीय सेना की सबसे खूंखार इकाई माना जाता है। 24 अप्रैल 1815 को स्थापित यह रेजिमेंट अपनी खुखरी और ‘जय मां काली, आयो गोरखाली’ के युद्धघोष के लिए विश्वविख्यात है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्धों में ब्रिटिश सेना के साथ लड़ते हुए इन गोरखा सिपाहियों ने असंख्य दुश्मनों का सफाया किया। स्वतंत्र भारत में कारगिल युद्ध और गलवान घाटी में इनकी निडरता ने चीन को करारा जवाब दिया। नेपाली मूल के इन जवानों की ट्रेनिंग इतनी कठिन होती है कि वे विषम परिस्थितियों में भी विजयी रहते हैं। पाकिस्तानी सेना इनका नाम सुनकर ही घुटने टेक देती है।

पैराशूट रेजिमेंट

पैराशूट रेजिमेंट भारतीय सेना की एलीट स्पेशल फोर्स है, जो हवाई हमलों और सर्जिकल स्ट्राइक्स में माहिर है। 1941 में गठित यह रेजिमेंट कारगिल युद्ध में टाइगर हिल जैसी चोटियों पर तिरंगा लहराने वाली थी। 2016 की उरी स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक में पैरा कमांडो ने दुश्मन ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। इनके जवानों की सटीक निशानेबाजी और गति दुश्मन को चकमा देती है। हाई-ऑल्टिट्यूड वारफेयर में इनकी महारत चीन के लिए खतरे की घंटी है।

बिहार रेजिमेंट

बिहार रेजिमेंट अपनी अटूट हिम्मत और ‘जय बजरंगबली’ के उद्घोष से दुश्मनों में भय पैदा करती है। द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर 1965 व 1971 के भारत-पाक युद्धों में इसने लोंगेवाला जैसी ऐतिहासिक जीत दर्ज की। गलवान वैली संघर्ष में बिहार रेजिमेंट के जवानों ने चीनी सैनिकों को पीछे धकेल दिया। अनुशासन और साहस इसकी पहचान हैं, जो सीमावर्ती इलाकों में दुश्मन की घुसपैठ को विफल करते हैं।​

कुमाऊं रेजिमेंट

कुमाऊं रेजिमेंट का इतिहास 1794 से जुड़ा है, जब इसे रेमंट कोर नाम दिया गया, बाद में 27 अक्टूबर 1945 को कुमाऊं रेजिमेंट बना। 1962 के भारत-चीन युद्ध में वालोंग चु बैटल में 114 जवानों ने 1300 चीनी सैनिकों का डटकर मुकाबला किया, जिसे ‘रण ऑफ वालोंग’ कहा जाता है। ‘तर छुड़ि तर महादेव’ उनका युद्धघोष है। इनकी निडरता ने चीन को सबक सिखाया, और आज भी यह रेजिमेंट हाई-ऑल्टिट्यूड क्षेत्रों में तैनात रहती है।​​

राजपूत रेजिमेंट

राजपूत रेजिमेंट (पूर्व राजपूताना राइफल्स) 1 अगस्त 1940 को स्थापित हुई, जो अपनी वीरता और ‘बोल श्री राजा रामचंद्र की जय’ के घोष से जानी जाती है। प्रथम विश्व युद्ध से करगिल तक इसने गौरवपूर्ण इतिहास रचा। असंभव परिस्थितियों में विजय प्राप्त करने वाली यह रेजिमेंट पाकिस्तान के लिए हमेशा चुनौती बनी रही। गणतंत्र दिवस परेड 2026 में इनकी परेड ने राष्ट्रगान गूंजाया।

ये रेजिमेंट्स न सिर्फ युद्धक्षेत्र में घातक हैं, बल्कि राष्ट्र की एकता का प्रतीक भी। इनके बलिदान से प्रेरित होकर नई पीढ़ी सेना में भर्ती हो रही है। गणतंत्र दिवस 2026 पर इनकी शानदार परेड ने दुनिया को भारत की ताकत दिखाई।

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info@divcomkonkan.in

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