
भारत में नाबालिगों (18 साल से कम उम्र) द्वारा वाहन चलाने और दुर्घटना करने पर कानून अब पहले से कहीं अधिक सख्त है, मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 199A के तहत, नाबालिग के बजाय उसके माता-पिता या वाहन मालिक को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जाता है।
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अभिभावक या वाहन मालिक के लिए सजा
यदि कोई नाबालिग गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है या दुर्घटना करता है, तो अभिभावक/मालिक के लिए निम्नलिखित दंड हैं:
- जेल: 3 साल तक की कैद।
- जुर्माना: ₹25,000 का आर्थिक दंड।
- बचाव का रास्ता: माता-पिता केवल तभी बच सकते हैं जब वे यह साबित कर दें कि अपराध उनकी जानकारी के बिना हुआ था या उन्होंने नाबालिग को रोकने के लिए पूरी सावधानी (Due Diligence) बरती थी।
नाबालिग के लिए परिणाम
- लाइसेंस पर प्रतिबंध: नाबालिग 25 साल की उम्र तक ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए अपात्र हो जाता है।
- जुवेनाइल जस्टिस एक्ट: नाबालिग पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में मुकदमा चलाया जाता है, गंभीर मामलों (जैसे मौत होने पर) में, 16-18 वर्ष के किशोरों पर वयस्क (Adult) के रूप में मुकदमा चलाने का आदेश भी दिया जा सकता है।
वाहन और बीमा पर प्रभाव
- रजिस्ट्रेशन रद्द: जिस वाहन से अपराध हुआ है, उसका रजिस्ट्रेशन (RC) 12 महीने के लिए रद्द कर दिया जाता है।
- बीमा क्लेम: नाबालिग द्वारा एक्सीडेंट किए जाने पर बीमा कंपनियां वाहन मालिक के ‘स्वयं के नुकसान’ (Own Damage) के दावों को खारिज कर सकती हैं।
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ताज़ा घटनाक्रम (फरवरी 2026)
हाल ही में दिल्ली के द्वारका में एक नाबालिग द्वारा की गई घातक दुर्घटना (फरवरी 2026) के बाद, अदालतों और पुलिस ने नाबालिगों के अभिभावकों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं (जैसे गैर-इरादतन हत्या की कोशिश) के तहत मामले दर्ज करना शुरू कर दिया है, प्रशासन अब स्कूलों और कोचिंग सेंटरों के माध्यम से जागरूकता अभियान और सख्त जांच चला रहा है।















