
देश के निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है, केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए लेबर कोड (New Labour Codes) के बाद अब ऑफिस कल्चर और काम के घंटों में व्यापक बदलाव आने वाला है, मीडिया रिपोर्ट्स और सरकार के हालिया रुख से साफ है कि नए नियमों के तहत कर्मचारियों को हफ्ते में काम के दिनों और शिफ्ट के घंटों को लेकर नए विकल्प मिलने जा रहे हैं।
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क्या है 48 घंटे का ‘गोल्डन रूल’?
नए लेबर कोड की सबसे बड़ी विशेषता 48 घंटे प्रति सप्ताह काम की समय-सीमा है, इस नियम के तहत कंपनियों को अपने कर्मचारियों से एक हफ्ते में 48 घंटे से अधिक काम लेने की अनुमति नहीं होगी, हालांकि, इन घंटों को कैसे विभाजित किया जाएगा, यह कंपनी और कर्मचारी की आपसी सहमति पर निर्भर करेगा।
शिफ्ट के आधार पर मिलेंगी छुट्टियां
नए नियमों के अनुसार, काम के घंटों और साप्ताहिक छुट्टियों का गणित कुछ इस प्रकार होगा:
- 12 घंटे की शिफ्ट: यदि कोई कर्मचारी दिन में 12 घंटे काम करता है, तो उसे सप्ताह में केवल 4 दिन काम करना होगा और 3 दिन की छुट्टी मिलेगी।
- 10 घंटे की शिफ्ट: इस स्थिति में कर्मचारी को हफ्ते में 5 दिन काम और 2 दिन का अवकाश मिलेगा।
- 8 घंटे की शिफ्ट: यदि कंपनी 8 घंटे की शिफ्ट जारी रखती है, तो कर्मचारी को हफ्ते में 6 दिन काम करना होगा।
ओवरटाइम और ग्रेच्युटी में बड़ा फायदा
नए लेबर कानून केवल छुट्टियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें वित्तीय सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है:
- दोगुना ओवरटाइम: यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय से अधिक काम करता है, तो उसे उसके सामान्य वेतन से दोगुना भुगतान करना अनिवार्य होगा।
- ग्रेच्युटी के नियम में ढील: अभी तक ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की निरंतर सेवा अनिवार्य थी, जिसे घटाकर अब 1 साल किया जा रहा है। इससे कम समय तक नौकरी करने वालों को भी बड़ा वित्तीय लाभ मिलेगा।
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बैंक कर्मचारियों के लिए खुशखबरी
बैंकिंग सेक्टर में भी 5-Day Work Week की मांग अब अंतिम चरण में है, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और कर्मचारी संगठनों के बीच इस पर सहमति बन चुकी है। अब केवल वित्त मंत्रालय और आरबीआई की अंतिम मुहर का इंतजार है, जिसके बाद बैंक कर्मचारियों को हर शनिवार-रविवार की छुट्टी मिल सकेगी।
कब से लागू होंगे नियम?
केंद्र सरकार ने इन चार लेबर कोड को अधिसूचित कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश राज्य सरकारों ने अपने ड्राफ्ट रुल्स तैयार कर लिए हैं उम्मीद जताई जा रही है कि पूरे देश में इन नियमों को 1 अप्रैल 2026 तक पूरी तरह से जमीन पर उतार दिया जाएगा।















