
आज के समय में खराब स्वास्थ्य या लंबी बीमारी के कारण कर्मचारियों को कई बार अपनी पेड लीव (सवैतनिक अवकाश) खत्म होने के बाद भी छुट्टी की जरूरत पड़ती है, ऐसी स्थिति में ‘लीव विदाउट पे’ (LWP) का विकल्प बचता है, लेकिन इसे लेकर कई नियम और कानूनी पेच हैं जो आपकी नौकरी की सुरक्षा तय करते हैं।
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क्या मेडिकल लीव के बाद नौकरी से निकाला जा सकता है?
कानूनी रूप से, केवल बीमार होने या मेडिकल लीव लेने की वजह से किसी कर्मचारी को नौकरी से निकालना गलत माना जाता है। भारत के श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों को कुछ विशेष सुरक्षा प्राप्त है:
- इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947: इसके तहत लंबी बीमारी के कारण की गई नौकरी समाप्ति को ‘रिट्रेंचमेंट’ (छंटनी) नहीं माना जाता।
- नियोक्ता की शर्तें: कंपनी आपको लंबी बीमारी (Continued ill-health) के आधार पर टर्मिनेट कर सकती है, लेकिन इसके लिए बीमारी का गंभीर और दीर्घकालिक होना अनिवार्य है।
- सुनवाई का मौका: किसी भी टर्मिनेशन से पहले कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर और कम से कम 30 से 90 दिन का नोटिस देना जरूरी है।
लीव विदाउट पे (LWP) के सख्त नियम
जब कर्मचारी की सभी ‘सवैतनिक छुट्टियां’ (Paid Leaves) खत्म हो जाती हैं, तब वह LWP का सहारा लेता है। इसके मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
- LWP कोई अधिकार नहीं है; इसे नियोक्ता की अनुमति के बिना नहीं लिया जा सकता। बिना बताए गायब रहना ‘अनुशासनहीनता’ माना जा सकता है।
- यदि LWP अधिकृत (Authorized) है, तो कर्मचारी की नौकरी बनी रहती है और उसकी सर्विस की निरंतरता (Continuity of Service) प्रभावित नहीं होती।
- कानून में LWP की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है, यह पूरी तरह से कंपनी की आंतरिक पॉलिसी और आपके उनके साथ संबंधों पर निर्भर करता है।
कर्मचारियों के लिए जरूरी सलाह
- लिखित अनुमति: लंबी छुट्टी के लिए हमेशा ईमेल या लिखित पत्र के जरिए अनुमति लें और वापसी की तारीख स्पष्ट करें।
- मेडिकल डॉक्यूमेंट्स: अपनी बीमारी के समर्थन में हमेशा रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर के दस्तावेज तैयार रखें।
- कानूनी उपाय: यदि बिना किसी ठोस आधार या प्रक्रिया के नौकरी से निकाला जाता है, तो कर्मचारी लेबर कोर्ट में इस टर्मिनेशन को चुनौती दे सकते हैं।















