ई-कचरे के अमबार में छिपे सोने ने चीन के एक साधारण शख्स को लखपति बना दिया। ग्वांगडोंग प्रांत के हुइझोउ शहर में रहने वाले कियाओ ने मात्र कबाड़ सिम कार्ड्स और पुरानी टेलीकॉम चिप्स से चमत्कार कर दिखाया। उन्होंने करीब 2 टन बेकार पड़े ई-वेस्ट से 191 ग्राम शुद्ध सोना निकाल लिया, जिसकी बाजार कीमत लगभग 26 लाख रुपये आंकी गई। यह वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है और लाखों लोगों को हैरान कर चुका है। कचरे से खजाना निकालने की यह कहानी न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग पर नई बहस भी छेड़ रही है।

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कचरे से सोने का सफर
कियाओ ने अपनी पूरी प्रक्रिया यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर रिकॉर्ड कर शेयर की, जो कुछ ही दिनों में 50 लाख से ज्यादा बार देखा गया। वीडियो में दिखाया गया कि कैसे कबाड़खाने से सस्ते दाम पर खरीदे गए पुराने सिम कार्ड्स को बड़े केमिकल ड्रमों में भिगोया गया। पहले इन्हें जंग लगने दिया गया, फिर नाइट्रिक एसिड जैसे तेजाबों से घोल दिया। उसके बाद उच्च तापमान पर गर्म करके सोने के कण अलग कर लिए गए। यह सोना सिम कार्ड्स के उन छोटे-छोटे संपर्क बिंदुओं से आया, जहां पतली सोने की परत चढ़ाई जाती है ताकि कनेक्शन मजबूत रहे और जंग न लगे। एक सिंगल सिम कार्ड में यह मात्रा माइक्रोग्राम्स में होती है, लेकिन लाखों सिम्स का ढेर जमा करने पर चमत्कार हो गया। कियाओ ने इसे ‘आधुनिक अलकेमिस्ट्री’ का नाम दिया, जो कचरे को सोने में बदल देती है।
सिम कार्ड्स में सोने का राज
सिम कार्ड्स और इलेक्ट्रॉनिक चिप्स में सोना इस्तेमाल होने का वैज्ञानिक कारण साफ है। सोना सर्वश्रेष्ठ कंडक्टर है, जो बिजली के सिग्नल्स को बिना रुकावट ट्रांसमिट करता है। साथ ही यह कभी ऑक्सीडाइज नहीं होता, यानी जंग-मुक्त रहता है। हर सिम के गोल्डन कॉन्टैक्ट्स इसी वजह से लगाए जाते हैं। चीन जैसे देशों में मोबाइल फोन और सिम्स का ई-वेस्ट पहाड़ बन चुका है। कियाओ ने इसी का फायदा उठाया। विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रति किलो सिम वेस्ट से 0.1 से 0.5 मिलीग्राम सोना निकाला जा सकता है। अगर बड़े स्तर पर रिसाइक्लिंग हो, तो यह कमाई का बड़ा जरिया बन सकता है। नेटिजंस कियाओ को ‘सोने का जादूगर’ बता रहे हैं।
खतरे की घंटी और चेतावनी
यह वीडियो भले ही आसान लगे, लेकिन इसमें छिपे खतरे भयानक हैं। तेजाबों और रसायनों का इस्तेमाल फेफड़ों, आंखों और त्वचा को जला सकता है। बिना सुरक्षात्मक गियर, वेंटिलेशन और ट्रेनिंग के यह जानलेवा साबित हो सकता है। सोशल मीडिया पर पुराने सिम कार्ड्स की खरीद-फरोख्त तेज हो गई है, लेकिन डॉक्टर और पर्यावरण विशेषज्ञ घर पर प्रयोग न करने की सलाह दे रहे हैं। गलत तरीके से रसायन निपटाने से मिट्टी और पानी प्रदूषित हो सकता है। भारत में ई-वेस्ट नियम सख्त हैं; अनधिकृत रिसाइक्लिंग पर जुर्माना और जेल हो सकती है।
भारत के लिए सीख
यह घटना भारत जैसे विकासशील देशों के लिए सबक है। यहां मोबाइल सिम्स और फोन्स का कचरा अरबों टन है। डिजिटल इंडिया और ई-वेस्ट पॉलिसी के तहत रिसाइक्लिंग प्लांट्स बढ़ रहे हैं। देहरादून-हरिद्वार जैसे क्षेत्रों में युवा कंटेंट क्रिएटर्स इसे कॉपी करने की होड़ न अपनाएं। सही तकनीक से कचरा खजाना बन सकता है। कियाओ की कहानी बताती है कि अवसर हर जगह छिपे हैं, बस पहचानने की जरूरत है। कुल मिलाकर, ई-वेस्ट को बोझ न मानकर संसाधन समझें।















