आज के दौर में पति-पत्नी, भाई-बहन या करीबी दोस्त मिलकर बैंक अकाउंट खोलते हैं ताकि खर्चों का बोझ बंट जाए। लेकिन यह सुविधा कभी-कभी घर-घर में कलह का कारण बन जाती है। एक छोटी सी गलती, जैसे गलत संचालन नियम चुनना, और रिश्ते दरकने लगते हैं। लाखों लोग बिना सोचे-समझे जॉइंट अकाउंट खोलते हैं, नतीजा कानूनी पचड़े और पारिवारिक झगड़े। आइए जानते हैं, अकाउंट खोलने से पहले कौन से नियमों को नजरअंदाज न करें।

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साझा खाते का मतलब समझें
जॉइंट अकाउंट यानी दो या ज्यादा लोगों का एक ही बैंक खाता। इसमें हर मालिक बराबर का हकदार होता है। लेकिन मुख्य बात यह तय करना है कि पैसा कैसे निकाला जाएगा। एक तरीका है जहां कोई भी एक व्यक्ति अकेले ही जमा-निकासी कर सके। अगर यह चुना जाए तो किसी एक की मौत पर बाकी लोग तुरंत पूरा कंट्रोल ले लें। दूसरा तरीका है जहां हर काम के लिए सबकी सहमति चाहिए। ज्यादातर लोग पहला वाला चुनते हैं क्योंकि आसान लगता है। मगर समस्या तब आती है जब एक पार्टनर बिना बताए सारा पैसा खाली कर दे। विश्वास उठ जाए तो रिश्ता कैसे बचेगा?
खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया
बैंक जाना पड़ेगा या ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। हर व्यक्ति को अपना-अपना पहचान पत्र देना जरूरी है जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी। भले ही किसी का पहले से अकाउंट हो, यहां फिर से सबूत मांगे जाते हैं। फॉर्म में साफ-साफ बताना पड़ता है कि संचालन कैसे होगा। इसके बाद यूपीआई या डेबिट कार्ड लिंक होता है। प्रक्रिया सरल लगती है लेकिन यहीं चूक हो जाती है। कई बार लोग दस्तावेजों में जल्दबाजी करते हैं और बाद में परेशान होते हैं।
गोपनीयता का खतरा
सबसे बड़ा जोखिम यह है कि एक व्यक्ति का कर्ज या बकाया साफ न करना पूरा खाता प्रभावित कर देता है। मान लीजिए पति का लोन बकाया है तो बैंक पत्नी के पैसे भी रोक ले। टैक्स का भी झमेला है। ब्याज पर कटौती हर मालिक को अलग-अलग देनी पड़ती है। मौत के बाद अगर नामांकन साफ न हो तो उत्तराधिकार का कोर्ट केस चलता रहता है। गोपनीयता भी खतरे में पड़ जाती है। पार्टनर एक-दूसरे के लेन-देन की पूरी जानकारी रख सकता है, जो झगड़े की जड़ बन जाता है। पंजाब जैसे राज्यों में संयुक्त परिवारों में ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
फायदे किन बातों पर निर्भर
सही तरीके से चलाया जाए तो यह खाता घरेलू खर्च, बच्चों की फीस या EMI चुकाने में बहुत मदद करता है। एक की अनुपस्थिति में बाकी लोग बिना रुकावट काम चला सकते हैं। लेकिन इसके लिए लिखित समझौता जरूरी है। तय कर लें कि कौन कितना पैसा डालेगा, निकासी की कोई सीमा होगी या नहीं। अगर विश्वास मजबूत न हो तो अलग-अलग खाते बेहतर विकल्प हैं।
बंद करने में भी मुश्किलें
अकाउंट बंद कराने के लिए भी सबकी सहमति चाहिए। एक पक्ष न माने तो महीनों कानूनी लड़ाई चलती है। शहरों में युवा जोड़े इसे फैशन समझते हैं लेकिन अनुभवी सलाह देते हैं कि पहले वकील से बात करें। पार्टनर से खुलकर चर्चा हो तो ही आगे बढ़ें।
सलाह जो बचाए रखे
जॉइंट अकाउंट लेने से पहले नियम अच्छे से पढ़ें। पारिवारिक वरिष्ठों या वित्तीय सलाहकार से राय लें। छोटी सी सावधानी से रिश्ते मजबूत रहेंगे। याद रखें, पैसा साझा हो सकता है लेकिन विश्वास का दांव उसी पर लगाएं जो लायक हो। अन्यथा यह सुविधा बोझ बन जाएगी।















