
भीषण गर्मी हो या मानसून का मौसम, घरों में पानी की टंकी में काई (Algae) जमना एक आम समस्या है, इस गंदगी की वजह से न केवल पानी से बदबू आने लगती है, बल्कि यह सेहत के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है, अगर आप भी बार-बार टंकी साफ करने के झंझट से परेशान हैं, तो एक प्राचीन ‘देसी जुगाड़’ आपकी किस्मत बदल सकता है।
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क्यों खास है जामुन की लकड़ी?
जामुन की लकड़ी को ‘जल शोधक’ (Water Purifier) के रूप में जाना जाता है। इसके पीछे कई वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण हैं:
- एंटी-बैक्टीरियल गुण: जामुन की लकड़ी में मौजूद प्राकृतिक तत्व पानी में पनपने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करते हैं।
- काई का काल: इस लकड़ी के संपर्क में आने से पानी में फंगस और काई (Algae) नहीं जमती, जिससे टंकी की दीवारें लंबे समय तक चिकनी और साफ बनी रहती हैं।
- सड़ती नहीं है यह लकड़ी: जामुन की लकड़ी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पानी में डूबे रहने पर भी जल्दी गलती या सड़ती नहीं है, बल्कि समय के साथ और मजबूत होती जाती है।
कैसे करें इस्तेमाल? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
अगर आप भी इस नुस्खे को आजमाना चाहते हैं, तो इसका तरीका बेहद आसान है:
- जामुन के पेड़ की एक मोटी टहनी या लकड़ी का टुकड़ा लें, ध्यान रहे कि लकड़ी सूखी और साफ हो।
- लकड़ी को इस्तेमाल करने से पहले सादे पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि उस पर जमी धूल-मिट्टी निकल जाए।
- 1000 लीटर की टंकी के लिए लगभग 1 से 2 फीट लंबी लकड़ी का टुकड़ा पर्याप्त है। इसे बस अपनी पानी की टंकी में डाल दें।
- एक बार लकड़ी डालने के बाद यह सालों तक अपना असर दिखाती है। कुछ दावों के अनुसार, यह 10 साल तक पानी को अशुद्धियों से मुक्त रख सकती है।
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पुरानी परंपराओं का आधुनिक समाधान
इतिहास गवाह है कि पुराने समय में कुओं की तली में जामुन की लकड़ी के लट्ठे (जिसे ‘नेम’ कहा जाता था) बिछाए जाते थे, दिल्ली की पुरानी बावड़ियों में आज भी जामुन की लकड़ी के अवशेष मिलते हैं, जो सदियों बाद भी खराब नहीं हुए हैं। आज के ‘RO’ के दौर में यह नुस्खा न केवल सस्ता है, बल्कि पूरी तरह ईको-फ्रेंडली भी है।















