होली की रौनक के बीच आम परिवारों को एक और महंगाई का धक्का लगा है। रसोई गैस के 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमतों में आज से 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हो गई। दिल्ली में अब यह 913 रुपये, मुंबई में 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये हो गया। पिछले एक साल से स्थिर चले आ रहे दामों में यह पहला बड़ा बदलाव है। तेल कंपनियों ने इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया।

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वैश्विक संकट का घरेलू असर
यह बढ़ोतरी मध्य पूर्व के तनावपूर्ण हालात से उपजी है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच उग्र होते विवाद ने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के वैश्विक दामों को ऊंचाई पर पहुंचा दिया। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का अधिकांश गैस आयात करता है, इस झटके से अछूता नहीं रह सका। तेल के दाम 85 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गए, जिससे एलपीजी की लागत बढ़ी। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि सप्लाई श्रृंखला पर दबाव ने कीमतों को चढ़ावा दिया।
शहरों में नई दरें
हर प्रमुख शहर में बढ़ोतरी एक समान दिख रही है। निम्न तालिका से साफ है कि उपभोक्ताओं का खर्च कितना बढ़ेगा:
| शहर | पुरानी कीमत रुपये में | नई कीमत रुपये में | वृद्धि रुपये में |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 853 | 913 | 60 |
| मुंबई | 852.50 | 912.50 | 60 |
| कोलकाता | 879 | 939 | 60 |
| चेन्नई | 868.50 | 928.50 | 60 |
कमर्शियल 19 किलो सिलेंडर पर भी 115 रुपये तक का इजाफा हुआ, जो दुकानदारों और छोटे व्यवसायों के लिए चुनौती बन गया। उज्ज्वला योजना के तहत लाखों महिलाओं को सब्सिडी लाभ मिलता रहेगा, लेकिन बाकी परिवारों को पूरा भार सहना पड़ेगा। बुकिंग पर जीएसटी अलग से जुड़ेगा।
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दामों का सफर
पिछले कुछ महीनों में एलपीजी दरें कई बार बदलीं। जनवरी 2026 में 111 रुपये का उछाल आया था, जबकि फरवरी में कुछ स्थिरता नजर आई। सरकार ने समय समय पर सब्सिडी देकर राहत देने की कोशिश की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव भारी पड़ा। यह सिलसिला अब महंगाई को नई ऊंचाई दे सकता है। विपक्षी दल इसे जनविरोधी कदम बता रहे हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष वैश्विक कारकों का हवाला दे रहा। अर्थशास्त्री चेतावनी दे रहे हैं कि इससे खुदरा महंगाई दर प्रभावित हो सकती।
उपभोक्ताओं के लिए व्यावहारिक सुझाव
लोगों को सतर्क रहना होगा। गैस एजेंसी के ऐप या वेबसाइट से खुद दरें जांचें और बुकिंग करें। देहरादून जैसे क्षेत्रों में डिलीवरी में देरी संभव है, इसलिए अग्रिम बुकिंग जरूरी। विशेषज्ञ वैकल्पिक रास्ते सुझा रहे, जैसे इंडक्शन चूल्हा या पाइप गैस कनेक्शन। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में परिवहन खर्च अतिरिक्त बोझ डालेगा। सरकार से सब्सिडी विस्तार की मांग तेज हो रही। ऊर्जा विभाग का रुख साफ है कि दरें बाजार पर निर्भर।
मध्यम वर्ग का बजट अब और तनावग्रस्त हो गया। सवाल यही है कि कब मिलेगी स्थायी राहत। परिवारों को अब रसोई खर्च पर कसीबंदी करनी पड़ेगी।















