बिजली कटौती भरी गर्मियों में इन्वर्टर बैटरी हर परिवार की रीढ़ बन जाती है। लेकिन दो-तीन साल पुरानी बैटरी जब आधे घंटे भी न चले, तो नई खरीदने का खर्च हजारों में चला जाता है। इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक सस्ती ट्रिक दावा कर रही है कि सिर्फ 10 रुपये के खाना सोडा से बैटरी का बैकअप दोगुना हो सकता है। लाखों लोग इसे आजमा चुके हैं, लेकिन सवाल वही है – क्या ये चमत्कार है या खतरनाक जुआ?

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ट्रिक कैसे काम करती है?
यह तरीका मुख्य रूप से ट्यूबुलर लेड-एसिड बैटरी के लिए है, जो लुमिनस या एक्साइड जैसी ब्रांड्स में आम हैं। सबसे पहले बैटरी को सुरक्षित जगह पर रखें और टर्मिनल्स को गर्म पानी से साफ करें। सफेद पाउडर या जंग हटाने के लिए पुराने कपड़े का इस्तेमाल करें। फिर हर सेल का ढक्कन खोलें और पानी का स्तर जांचें। अगर ग्रेविटी कम हो, तो आधा एसिड निकालकर अलग रखें। अब एक-एक चम्मच खाना सोडा डालें। ये सोडा एसिड से मिलकर झाग बनाता है, जो सल्फेट के क्रिस्टल्स को घोलने का काम करता है। इसके बाद धीरे-धीरे चार्ज करें, जब तक बुलबुले न थम जाएं। आखिर में एसिड वापस भरें और 24 घंटे चार्जिंग पर लगाएं। कई लोग बताते हैं कि 1-2 घंटे वाली बैटरी अब 3-4 घंटे चलने लगी।
विज्ञान के आईने में सच्चाई
लेड-एसिड बैटरी में सल्फेशन बड़ी समस्या है। बार-बार डीप डिस्चार्ज से प्लेट्स पर क्रिस्टल्स जम जाते हैं, जो चार्जिंग रोकते हैं। सोडा एसिड को न्यूट्रलाइज करता है और अस्थायी रूप से क्रिस्टल्स ढीले पड़ते हैं। शुरुआती दिनों में बैकअप बढ़ता दिखता है, लेकिन ये स्थायी नहीं। सोडा मिलने से इलेक्ट्रोलाइट कमजोर हो जाता है, जो बैटरी की असली क्षमता घटा देता है। महीने भर बाद असर कम हो जाता है। टर्मिनल साफ करना फायदेमंद है, लेकिन सेल्स में सोडा डालना प्लेट्स को नुकसान पहुंचा सकता है। असल में ये ट्रिक इमरजेंसी फिक्स है, लंबे समय का हल नहीं।
छिपे खतरे जो जान बचाएं
एसिड से जलन का खतरा सबसे बड़ा है। त्वचा पर लगे तो छाले पड़ जाते हैं, आंखों में जाए तो अंधापन। हाइड्रोजन गैस बनती है, जो चिंगारी से फट सकती है। हमेशा दस्ताने, चश्मा पहनें और खुली हवा वाली जगह चुनें। अगर बैटरी में काला पानी दिखे, तो प्लेट्स खराब हैं – ट्रिक न आजमाएं। वारंटी भी खत्म हो जाएगी। कई मामलों में लोग झुलस जाते हैं या बैटरी पूरी तरह बर्बाद हो जाती है।
सही रखरखाव के आसान उपाय
ट्रिक से बेहतर है नियमित देखभाल। हर महीने डिस्टिल्ड वॉटर भरें, स्तर रिफिल होल के नीचे तक रखें। 13.5 से 14.5 वोल्ट पर चार्ज करें, ओवरलोड न करें। टर्मिनल्स बेकिंग सोडा के पानी से साफ करें, लेकिन अंदर न डालें। समान क्षमता वाली दूसरी बैटरी जोड़ें तो बैकअप दोगुना मिलेगा। डिसल्फेटर डिवाइस या इक्वलाइजेशन चार्ज आजमाएं। पंखे वाली ठंडी जगह पर रखें ताकि गर्मी न पकड़े।
आखिर फैसला आपका
10 रुपये की ये चालाकी तात्कालिक राहत दे सकती है, लेकिन स्मार्ट घर नई बैटरी या सोलर सिस्टम चुनेंगे। लुधियाना के तकनीशियन बताते हैं कि सही देखभाल से बैटरी 5 साल चलेगी। बिजली संकट में जुगाड़ ठीक, लेकिन सुरक्षा पहले। आपकी बैटरी ने क्या सिखाया? साझा करें।















