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ट्रेन के डिब्बों पर लिखे 5 अंकों का क्या है रहस्य? एक नंबर से पता चल जाएगी कोच की पूरी कुंडली; यात्री जरूर जान लें

क्या आपने कभी ट्रेन के डिब्बों पर लिखे 5 अंकों के कोड पर गौर किया है? यह सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि कोच की उम्र और उसकी क्लास का पूरा कच्चा चिट्ठा है। रेलवे के इस 'सीक्रेट कोड' को डिकोड करने और अपनी यात्रा को और भी स्मार्ट बनाने के लिए अभी पढ़ें।

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ट्रेन के डिब्बों पर लिखे 5 अंकों का क्या है रहस्य? एक नंबर से पता चल जाएगी कोच की पूरी कुंडली; यात्री जरूर जान लें
ट्रेन के डिब्बों

अगर आप अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं, तो आपने कोच के बाहर लिखे खास नंबरों को जरूर देखा होगा। बहुत से लोग इसे सिर्फ डिब्बे की पहचान के लिए एक साधारण नंबर समझते हैं, लेकिन असल में इन नंबरों में ट्रेन के डिब्बे से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण जानकारी छिपी होती है। इन नंबरों के शुरुआती अंक बताते हैं कि वह डिब्बा किस साल में बनाया गया है, जबकि आखिरी अंक यह दर्शाते हैं कि वह डिब्बा किस कैटेगरी (जैसे AC, स्लीपर या जनरल) का है। रेलवे की इस कोडिंग प्रणाली को समझना यात्रियों के लिए काफी दिलचस्प हो सकता है।

ट्रेन के डिब्बों पर लिखे नंबरों का ‘कोड’

ट्रेन के हर कोच पर लिखे 5 या 6 अंकों के नंबर कोई साधारण गिनती नहीं, बल्कि उस कोच की पूरी ‘जन्म कुंडली’ होते हैं। इन नंबरों के शुरुआती दो अंक हमें यह बताते हैं कि वह विशेष डिब्बा किस साल में बनकर तैयार हुआ था। उदाहरण के लिए, यदि किसी कोच पर 05052 लिखा है, तो इसका मतलब है कि वह कोच साल 2005 में बना है। इसी तरह, 98331 नंबर वाले कोच का अर्थ है कि उसका निर्माण 1998 में हुआ था। यह कोडिंग सिस्टम रेलवे को डिब्बों के रखरखाव और उनकी उम्र ट्रैक करने में मदद करता है।

उदाहरण से समझें:

  • 95XXX: साल 1995 में बना कोच।
  • 12XXX: साल 2012 में बना कोच।
  • 21XXX: साल 2021 में बना कोच।

आखिरी के तीन नंबर का मतलब

ट्रेन के डिब्बे पर लिखे 5 अंकों के नंबर में आखिरी के तीन अंक यह बताते हैं कि वह डिब्बा किस श्रेणी (Class) का है। रेलवे ने इसके लिए एक खास नंबर रेंज तय की है:

  • 1 से 200 तक (AC Class): यदि आखिरी तीन नंबर 001 से 200 के बीच हैं, तो समझ जाइए कि वह AC कोच (First, Second या Third AC) है।
  • 200 से 400 तक (Sleeper Class): अगर ये नंबर 201 से 400 के बीच हैं, तो वह डिब्बा स्लीपर क्लास का होता है।

उदाहरण से समझें:

मान लीजिए किसी कोच पर नंबर 05251 लिखा है:

  1. 05 (पहले दो अंक): यह डिब्बा साल 2005 में बना है।
  2. 251 (आखिरी तीन अंक): चूँकि यह 200 से 400 के बीच है, इसलिए यह एक स्लीपर कोच है।

400 से 600 का कोड

ट्रेन के कोच पर लिखे 5 अंकों के नंबर में अगर आखिरी के तीन अंक 401 से 600 के बीच होते हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि वह एक जनरल (General) डिब्बा है। भारतीय रेलवे की इस स्मार्ट कोडिंग से न केवल रेलवे स्टाफ को, बल्कि जागरूक यात्रियों को भी कोच की उम्र और उसकी श्रेणी का तुरंत पता चल जाता है।

अगली बार जब आप स्टेशन पर हों, तो इन नंबरों को देखकर आप खुद कोच की पहचान कर सकते हैं:

आखिरी 3 अंकों की रेंजकोच का प्रकार (Category)
001 – 200AC कोच (First, Second, या Third AC)
201 – 400स्लीपर कोच
401 – 600जनरल कोच
601 – 700सेकंड क्लास सीटिंग (2S)
701 – 800लगेज, ब्रेक वैन या जनरेटर कार
Indian Railway Coach Codes Railway Safety and Maintenance Train Coach Number Meaning
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info@divcomkonkan.in

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