वैश्विक यात्रा की दुनिया में भारत का पासपोर्ट तेजी से अपनी ताकत दिखा रहा है। हाल ही में जारी विश्व प्रसिद्ध पासपोर्ट रैंकिंग में भारतीय दस्तावेज ने पांच पायदान ऊपर चढ़ते हुए 80वां स्थान हासिल कर लिया। इसका मतलब है कि अब भारतीय नागरिक 55 देशों में बिना वीजा के या आगमन पर वीजा लेकर घूम सकते हैं। यह उपलब्धि देश की कूटनीतिक प्रगति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की मजबूती का प्रतीक है।

पिछले वर्षों की तुलना करें तो यह प्रगति उल्लेखनीय है। एक साल पहले भारत 85वें स्थान पर था, जबकि उससे पहले 80वें पर टिका हुआ था। इस बार अल्जीरिया और नाइजर जैसे देशों के साथ संयुक्त रूप से यह मुकाम हासिल हुआ। वीजा मुक्त गंतव्यों की संख्या में थोड़ी कमी तो आई, लेकिन अन्य देशों की रैंकिंग खिसकने से भारत को फायदा मिला। ऐसे में भारतीय यात्रियों को थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया जैसे लोकप्रिय स्थानों पर आसानी से पहुंचने का मौका मिला।
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रैंकिंग कैसे तय होती है?
यह रैंकिंग अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा संगठन के आंकड़ों पर आधारित होती है। इसमें देखा जाता है कि किसी देश का पासपोर्ट कितने गंतव्यों पर बिना पूर्व अनुमति के काम करता है। मजबूत अर्थव्यवस्था, स्थिर राजनीति और व्यापक द्विपक्षीय समझौते वाले देश ऊपर रहते हैं। भारत के संदर्भ में हाल के समझौतों ने इसमें इजाफा किया। कोविड महामारी के बाद पर्यटन और व्यापार बढ़ने से वैश्विक मोबिलिटी में बदलाव आया, जिसका असर दिख रहा है।
शीर्ष पासपोर्ट धारकों का दबदबा
सिंगापुर इस सूची में फिर शीर्ष पर काबिज है। उसके नागरिक 192 देशों में बेझिझक जा सकते हैं। जापान और दक्षिण कोरिया संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं, जहां 188 गंतव्य उपलब्ध हैं। उसके बाद डेनमार्क, लक्जमबर्ग, स्पेन, स्वीडन और स्विट्जरलैंड तीसरे पायदान पर बराबरी कर रहे हैं। 186 देशों तक पहुंच इनका विशेषाधिकार है। यूरोपीय देशों का समूह चौथे स्थान पर है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने पांचवां स्थान लिया। अमेरिका दसवें नंबर पर लौटा, लेकिन उसकी सुविधाएं भी घटकर 179 रह गईं।
नीचे की ओर नजर डालें तो अफगानिस्तान सबसे कमजोर साबित हुआ। वहां के लोग महज 24 देशों तक सीमित हैं। पाकिस्तान भी भारत से काफी पीछे है। यह अंतर वैश्विक असमानता को उजागर करता है।
भारत के यात्रियों के लिए क्या बदला
अब भारतीय पर्यटक, व्यापारी और छात्रों को कई एशियाई और अफ्रीकी देशों में झंझट मुक्त यात्रा का लाभ मिलेगा। लेकिन यूरोप और अमेरिका जैसे प्रमुख क्षेत्र अभी भी वीजा प्रक्रिया से बंधे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को और अधिक समझौते करने चाहिए। आर्थिक विकास और सॉफ्ट पावर से भविष्य में रैंकिंग बेहतर हो सकती है।
आगे की राह आसान नहीं
यह छोटी सी जीत भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को बल देती है। आने वाले समय में सक्रिय कूटनीति से 70वें पायदान तक पहुंचना संभव है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि हमेशा नवीनतम नियम जांच लें। कुल मिलाकर, भारतीय पासपोर्ट धारक अब दुनिया के दरवाजों पर दस्तक दे रहे हैं। यह बदलाव न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि आर्थिक अवसरों को भी बढ़ाएगा। देश की बढ़ती साख इसी का प्रमाण है।















