
आयकर विभाग ने टैक्स व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव का ऐलान कर दिया है। ‘इनकम टैक्स रूल्स 2026’ का ड्राफ्ट जारी करते हुए विभाग ने गहनों, पेंटिंग्स और प्रॉपर्टी की फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) तय करने के लिए नया ‘रूल 57’ पेश किया है। यह ड्राफ्ट आगामी 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले ‘इनकम टैक्स एक्ट, 2025’ का आधार बनेगा, जो 1962 के पुराने नियमों को पूरी तरह बदल देगा।
विभाग ने पारदर्शिता के नाम पर ड्राफ्ट को पब्लिक डोमेन में डाल दिया है। स्टेकहोल्डर्स और आम टैक्सपेयर्स 22 फरवरी 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं। नांगिया ग्लोबल के पार्टनर संदीप झुनझुनवाला बताते हैं, “पुराने नियम 11UA, 11UAA और 11UAB को एकीकृत कर रूल 57 बनाया गया है, जो वैल्यूएशन को सरल और विवाद-रहित बनाएगा।” यह बदलाव उन लाखों परिवारों को सीधे प्रभावित करेगा, जिनके पास घर में सोना या प्रॉपर्टी है।
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स्मार्ट फॉर्म्स से टैक्स फाइलिंग बनेगी आसान
टैक्सपेयर्स की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए नए फॉर्म्स को ‘स्मार्ट’ बनाया गया है। इनमें प्री-फिल्ड डेटा, ऑटोमेटेड रिकांसिलेशन और सरल फॉर्मूले होंगे। जटिल टेबल्स हटाकर भाषा को आम बोलचाल की कर दिया गया है। विभाग का दावा है कि इससे गलतियां 50% तक कम होंगी और सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग तेज होगी। पुरानी redundant धाराओं को काटकर फॉर्म्स को लाइटवेट किया गया है, जो मोबाइल ऐप्स पर भी आसानी से काम करेंगे।
सोना-ज्वेलरी की नई वैल्यूएशन
घर का सोना अब चोर की तरह छिप नहीं सकेगा! ओपन मार्केट में वैल्यूएशन डेट पर बिक्री मूल्य ही FMV मानी जाएगी। रजिस्टर्ड डीलर से खरीदी ज्वेलरी के लिए इनवॉइस मान्य, लेकिन ₹50,000 से ऊपर कीमत पर रजिस्टर्ड वैल्यूअर की रिपोर्ट जरूरी। उपहार या विरासत में मिले गहनों के लिए भी यही नियम। बिना बिल के सोने की सीमा सख्त: विवाहित महिलाएं 500 ग्राम, अविवाहित 250 ग्राम, पुरुष 100 ग्राम तक। इससे कैपिटल गेन टैक्स की गणना आसान होगी।
प्रॉपर्टी और पेंटिंग्स पर सख्ती
अचल संपत्ति (जमीन-बिल्डिंग) की FMV स्टांप ड्यूटी वैल्यू पर तय होगी, जो राज्य-केंद्र सरकारें फिक्स करती हैं। इससे ब्लैक मनी का खेल खत्म। पेंटिंग्स, स्कल्पचर्स या आर्टवर्क के लिए भी ज्वेलरी जैसा नियम- ₹50,000 से अधिक पर वैल्यूअर रिपोर्ट अनिवार्य। अन्य संपत्तियों के लिए ओपन मार्केट प्राइस आधार। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रियल एस्टेट में पारदर्शिता लाएगा।
होल्डिंग पीरियड और कैपिटल गेन में बदलाव
रूल 6 के तहत होल्डिंग पीरियड की गणना सरल। शेयर्स में कन्वर्ट बॉन्ड्स का पुराना समय जोड़ेगा। IDS 2016 स्कीम की प्रॉपर्टी के लिए डीड डेट से काउंट, वरना 1 जून 2016 से। विदेशी ब्रांच से ट्रांसफर संपत्ति में पुराना पीरियड शामिल। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5% फ्लैट टैक्स बिना इंडेक्सेशन। प्रॉपर्टी बिक्री लाभ स्लैब रेट से टैक्सेबल। विरासत सोने पर मूल खरीद तिथि से गणना।
वैल्यूअर्स के नए मापदंड
वैल्यूएशन की विश्वसनीयता के लिए अकाउंटेंट्स को 10 साल अनुभव, ₹50 लाख वार्षिक रसीद या पार्टनरशिप फर्म के लिए ₹3 करोड़ टर्नओवर जरूरी। यह कदम फर्जी रिपोर्ट्स रोकेगा। कुल मिलाकर, ये बदलाव टैक्स चोरी पर लगाम लगाएंगे और ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत देंगे। लेकिन छोटे निवेशकों को वैल्यूअर रिपोर्ट की मजबूरी भारी पड़ सकती है। 22 फरवरी तक सुझाव भेजें- आपकी आवाज मायने रखेगी!















