वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नई आयकर व्यवस्था ने सैलरी कमाने वालों की फाइनेंशियल प्लानिंग को हिला दिया है। बजट 2026 में टैक्स स्लैब में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, लेकिन स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया। हालांकि HRA जैसी महत्वपूर्ण छूट नई रिजीम में बिल्कुल उपलब्ध नहीं है, जिससे किराएदार कर्मचारियों को झटका लगा है। मिडिल क्लास परिवारों को अब पुरानी व्यवस्था की ओर लौटना पड़ सकता है।

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HRA छूट का अंत
नई टैक्स रिजीम पूरी तरह डिडक्शन-मुक्त है, इसलिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर कोई छूट नहीं मिलती। पुरानी व्यवस्था में मेट्रो शहरों के किराएदार सैलरी का 40-50 प्रतिशत तक टैक्स बचाते थे। उदाहरण के लिए, 15 लाख रुपये सालाना कमाई वाले व्यक्ति को HRA से करीब 40,000 रुपये की बचत हो सकती थी। अब यह सुविधा बंद होने से लाखों नौकरीपेशा लोग परेशान हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आपका किराया खर्च ज्यादा है, तो पुरानी रिजीम चुनें।
स्टैंडर्ड डिडक्शन में दोगुनी राहत
अच्छी खबर यह है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 75,000 रुपये किया गया है। इससे सैलरी 12.75 लाख रुपये तक वाले लोग टैक्स-फ्री सीमा का पूरा फायदा उठा सकते हैं। 60,000 रुपये की रिबेट के साथ 12 लाख आय पर शून्य टैक्स लगेगा। यह बदलाव नौकरीपेशा वर्ग को सीधी राहत देता है, लेकिन निवेश पर निर्भर लोगों को सोचने की जरूरत है।
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पांच बड़े बदलाव जो आपकी जेब प्रभावित करेंगे
नई व्यवस्था सरलता पर जोर देती है, लेकिन कई जाल छिपे हैं। पहला, टैक्स-फ्री लिमिट 12 लाख रुपये (सैलरी पर 12.75 लाख) हो गई, जहां रिबेट 60,000 तक मिलेगी। दूसरा, स्लैब सरल हैं- 4 लाख तक शून्य, 4-8 लाख पर 5 प्रतिशत, 8-12 लाख पर 10 प्रतिशत, और ऊपर क्रमशः 15-30 प्रतिशत। तीसरा, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 20 प्रतिशत और लॉन्ग टर्म पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगेगा, जो शेयर निवेशकों के लिए चुनौती है। चौथा, टीडीएस में छूट जैसे ई-कॉमर्स पर 0.1 प्रतिशत और डिविडेंड पर राहत से सालाना रिटर्न आसान हो गया। पांचवां, 80C, 80D जैसी छूटें पूरी तरह बंद हैं- PPF, ELSS या हेल्थ इंश्योरेंस पर कोई लाभ नहीं।
निवेश और बचत की नई रणनीति
14.65 लाख सैलरी पर भी जीरो टैक्स संभव है, लेकिन HRA या 80C का फायदा उठाने वाले पुरानी रिजीम अपनाएं। आयकर रिटर्न फाइल करने से पहले ऑनलाइन कैलकुलेटर से दोनों विकल्पों की तुलना करें। वित्त मंत्रालय डिजिटल अनुपालन बढ़ा रहा है, लेकिन मिडिल क्लास HRA सीमा बढ़ाने की मांग कर रहा है। अगर आप कंटेंट क्रिएटर या जर्नलिस्ट हैं, तो इन बदलावों को अपने फाइनेंशियल प्लान में तुरंत शामिल करें। सही फैसला लेकर आप हजारों रुपये बचा सकते हैं।















