
भारतीय वैवाहिक कानूनों में आए हालिया बदलावों और माननीय सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम दिशानिर्देशों के बाद, 2026 में पतियों के लिए तलाक की कानूनी प्रक्रिया और आधारों में स्पष्टता आई है, हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत अब केवल शारीरिक प्रताड़ना ही नहीं, बल्कि कई अन्य स्थितियों में भी पति कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
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क्रूरता (Cruelty) – धारा 13(1) (i-a)
यह तलाक का सबसे व्यापक आधार है। इसमें शारीरिक हिंसा के साथ-साथ मानसिक क्रूरता भी शामिल है। 2026 के हालिया अदालती रुझानों के अनुसार, निम्नलिखित को क्रूरता माना गया है:
- झूठे आरोप: पति या उसके परिवार पर दहेज (498A) या अन्य आपराधिक मामलों के झूठे आरोप लगाना।
- महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना: शादी से पहले अपनी असली उम्र या किसी आपराधिक सजा (जैसे हत्या के मामले में दोषसिद्धि) को छिपाना।
- अपमानजनक व्यवहार: सार्वजनिक रूप से पति का अपमान करना या बिना ठोस कारण के शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना।
परित्याग (Desertion) – धारा 13(1) (i-b)
यदि पत्नी बिना किसी उचित कारण और बिना पति की सहमति के लगातार 2 वर्ष या उससे अधिक समय से अलग रह रही है, तो पति तलाक के लिए अर्जी दे सकता है।
विवाह का अपरिवर्तनीय विघटन (Irretrievable Breakdown)
सुप्रीम कोर्ट ने 2025-26 के फैसलों में अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए उन शादियों को खत्म करने की अनुमति दी है जो पूरी तरह टूट चुकी हैं और जिनमें सुलह की कोई गुंजाइश नहीं बची है। कोर्ट ने माना है कि लंबे समय (जैसे 10-24 साल) का अलगाव अपने आप में क्रूरता के समान है।
व्यभिचार (Adultery) – धारा 13(1)(i)
शादी के बाद यदि पत्नी स्वेच्छा से किसी अन्य पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाती है, तो पति इस आधार पर तलाक ले सकता है।
5. अन्य वैधानिक आधार
- धर्म परिवर्तन: यदि पत्नी हिंदू धर्म त्याग कर किसी अन्य धर्म को अपना लेती है।
- मानसिक विकार: यदि पत्नी किसी गंभीर और लाइलाज मानसिक बीमारी से पीड़ित है जिससे साथ रहना असंभव हो।
- संसार का त्याग (Renunciation): यदि पत्नी ने धार्मिक आधार पर संसार का परित्याग कर दिया हो।
- लापता होना: यदि पत्नी के बारे में पिछले 7 वर्षों से कुछ भी न सुना गया हो।
2026 के महत्वपूर्ण अपडेट:
- शीतलन अवधि (Cooling-off Period): कुछ मामलों में, आपसी सहमति (Section 13-B) से तलाक के लिए अनिवार्य 6 महीने की प्रतीक्षा अवधि को अदालत अब माफ कर सकती है ताकि प्रक्रिया तेज हो सके।
- भरण-पोषण (Alimony): सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में नए नियम तय किए हैं, जिसमें मुद्रास्फीति के अनुसार भरण-पोषण राशि में समय-समय पर वृद्धि का प्रावधान किया गया है।















